आगामी कार्यक्रम

33वां स्थापना दिवस वार्षिक व्याख्यान

स्थानः क्रिस्टल रूम, ताज महल होटल, मुंबई

दिनांकः 21 दिसम्बर, 2017

समयः सायं 6 बजे

बैंकिंग जगत के भावी नेतृत्व के लिए

एक्ज़िम बैंक द्वारा स्थापना दिवस वार्षिक व्याख्यान माला की शुरुआत 1986 में बैंक के परिचालन शुरू होने के उपलक्ष्य में की गई थी। इस व्याख्यान माला के अंतर्गत हर वर्ष एक ख्यातिलब्ध विशेषज्ञ/विचारक को भारतीय व वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव डालने वाले समसामयिक मुद्दों पर व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किया जाता है।

इस वार्षिक व्याख्यान माला का उद्देश्य विचारकों और प्रबुद्धजनों के बीच वैश्वीकरण पर जारी विचार-विमर्श को आगे बढ़ाना और इसमें महत्त्वपूर्ण योगदान देना है। गत वर्षों में कारोबारी जगत, शिक्षाविदों और समाज के अन्य वर्गों के प्रोत्साहन व सहयोग से एक्ज़िम बैंक की इस वार्षिक व्याख्यान माला ने मुंबई के सार्वजनिक जीवन में एक महत्त्वपूर्ण स्थान बना लिया है।

33वां स्थापना दिवस वार्षिक व्याख्यान

33वां स्थापना दिवस वार्षिक व्याख्यान प्रोफेसर गीता गोपीनाथ द्वारा दिया जाएगा। वह वर्तमान में हार्वर्ड विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग में इंटरनेशनल स्टडीज़ एंड इकनॉमिक्स की जॉन ज़्वान्स्ट्रा प्रोफेसर हैं। 2011 में उन्हें विश्व आर्थिक मंच द्वारा यंग ग्लोबल लीडर के रूप में भी चुना जा चुका है। हार्वर्ड आने से पहले वह यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के ग्रैजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस में सहायक प्रोफेसर रह चुकी हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से 1992 में बीए किया और 1994 में दिल्ली स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स तथा 1996 में यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन से एमए किया। इसके बाद 2001 में प्रिंसटन विश्वविद्यालय से पीएचडी की।

उनके व्याख्यान का विषय ‘व्यापार में डॉलर का प्रभुत्वः तथ्य और प्रभाव’ है।

पिछले चार दशकों में अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वित्त में हुए महत्त्वपूर्ण विकास ने अर्थशास्त्र और राजनीति को बदल दिया है। पिछले दशक के वैश्विक वित्तीय संकट ने अर्थशास्त्र की कई मौजूदा मान्यताओं को चुनौती दी है। इसे सही परिप्रेक्ष्य में समझना महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय अर्थशास्त्र के कई आधारभूत सवालों को समझने में मदद मिलती है। जैसे- मुद्रा विनिमय दर में उतार-चढ़ाव महंगाई और व्यापार को कैसे प्रभावित करता है? अमेरिका की मौद्रिक नीति शेष विश्व को कैसे प्रभावित करती है? उभरते बाजारों और केंद्रीय बैंकरों को कौनसी विनिमय दर नीति अपनानी चाहिए? वित्तीय बाजारों में डॉलर इतना महत्त्वपूर्ण क्यों है? प्रोफेसर गीता गोपीनाथ के व्याख्यान में इसी तरह के अन्य सवालों के भी जवाब मिलेंगे।

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