प्रो. केइको होंडा ने दिया एक्ज़िम बैंक का 37वां स्थापना दिवस वार्षिक व्याख्यान, कहा- 30 ट्रिलियन यूएस डॉलर के पार पहुंचा संपोषी निवेश, ऐसे निवेशों में प्रभाव निवेश केवल 5%
मुंबई, 15 अप्रैल 2026। मुंबई में 15 अप्रैल, 2026 को संपोषी निवेश पर गहन चर्चा हुई। मौका था एक्ज़िम बैंक के 37वें स्थापना दिवस वार्षिक व्याख्यान का। विश्व बैंक समूह की सदस्य मल्टीलैटरल इन्वेस्टमेंट गारंटी एजेंसी (एमआईजीए) की मुख्य कार्यकारी अधिकारी रह चुकीं प्रो. केइको होंडा इसमें वक्ता के रूप में उपस्थित रहीं। प्रो. होंडा ने अपनी इस भूमिका में रहते हुए उभरते बाजारों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को बढ़ावा देने संबंधी पहलों का नेतृत्व किया था। प्रो. होंडा ने इस व्याख्यान में “संपोषी निवेश: अब तक का सफर और आगे की राह” विषय पर चर्चा की।
अपने व्याख्यान में प्रो. होंडा ने संपोषी निवेश और ईएसजी निवेश के इतिहास को रेखांकित करते हुए कहा कि यह क्षेत्र इस समय एक महत्त्वपूर्ण मोड़ पर है। उन्होंने ईएसजी निवेश, संपोषी निवेश और प्रभाव निवेश के बीच स्पष्ट अंतर बताते हुए कल्याणकारी, सामाजिक रूप से उत्तरदायी निवेश और उत्तरदायित्वपूर्ण निवेश जैसे अन्य पहुलों पर भी बात की।
प्रो. होंडा ने बताया कि ईएसजी निवेश में गैर-वित्तीय फैक्टरों को निवेश संबंधी निर्णयों में शामिल किया जाता है। इसका उद्देश्य दीर्घकालिक रिटर्न को बेहतर करना है। उन्होंने बताया कि प्रभाव निवेश का लक्ष्य वित्तीय रिटर्न के साथ-साथ सकारात्मक सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव डालना है। प्रो. होंडा ने ग्लोबल इम्पैक्ट इन्वेस्टमेंट नेटवर्क के शोध का हवाला देते हुए बताया कि लगभग 65% प्रभाव निवेशक मार्केट-रेट रिटर्न की अपेक्षा रखते हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कुल ईएसजी और संपोषी निवेश लगभग 30 ट्रिलियन यूएस डॉलर का है, जबकि प्रभाव निवेश लगभग 1.6 ट्रिलियन यूएस डॉलर का है। यह कुल निवेश का करीब 5% है।
प्रो. होंडा ने कहा कि अधिकांश ईएसजी निवेशक उच्च वित्तीय रिटर्न हासिल करने के उद्देश्य से निवेश करते हैं और कई संस्थागत निवेशकों के लिए ईएसजी एक 'वैल्यू-ड्रिवन अप्रोच' न होकर 'रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न' को बेहतर बनाने का प्रभावी टूल है। यानी निवेशक मूल्यों के बजाय कम जोखिम वाले रिटर्न को तरजीह देते हैं। उन्होंने बताया कि ईएसजी फैक्टर अक्सर न्यून-संभावना, लेकिन उच्च-प्रभाव जोखिम स्वरूप के होते हैं। ये लंबे समय में निवेशों के रिस्क-रिर्टन प्रोफाइल को उल्लेखनीय रूप से प्रभावित कर सकते हैं। इसके लिए उन्होंने एक केस स्टडी का उदाहरण दिया, जिसमें नौ में से सात ईएसजी इक्विटी इन्डिसीज़ का निष्पादन अपनी मूल इक्विटी इन्डिसीज़ से बेहतर रहा। यह ईएसजी एकीकरण और रिटर्न के बीच सकारात्मक संबंध को दर्शाता है।
प्रो. होंडा ने संपोषी निवेश में प्रमुख चुनौतियों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में अभी सर्वमान्य परिभाषाओं का अभाव है। डेटा की कमी है। मैटीरियल ईएसजी कारकों को चिह्नित करना कठिन है। नियमित रूप से अधिक रिटर्न को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है और राजनीतिक स्तर पर भी इस विषय पर एकमत की स्थिति नहीं दिखती है।
उन्होंने वैश्विक प्रकटीकरण परिदृश्य का विश्लेषण करते हुए कहा कि इसमें अंतरराष्ट्रीय मानकों की भूमिका महत्त्वपूर्ण है, लेकिन यूरोप, जापान और अमेरिका के अलग-अलग दृष्टिकोण के चलते सस्टैनेबिलिटी प्रकटीकरण का परिदृश्य बिखरा हुआ है। उन्होंने यह भी बताया कि यूएस की प्रमुख वित्तीय संस्थाओं में ईएसजी पॉज़िशनिंग में बदलाव देखा जा रहा है, जहां बढ़ते राजनीतिक दबाव के चलते सार्वजनिक जलवायु प्रतिबद्धताओं से दूरी बनाई जा रही है और एक अधिक सतर्क रणनीति अपनाई जा रही है, जिसे ‘ग्रीनहशिंग’ कहा जाता है।
प्रो. होंडा ने आगे की राह पर बात करते हुए कहा कि संपोषी निवेश पारदर्शिता और वित्तीय सुदृढ़ता पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने बाजार के बेंचमार्क के अनुरूप स्पष्ट रिटर्न अपेक्षाएं निर्धारित करने और कॉर्पोरेट वैल्यू के लिए अहम, केवल मैटीरियल ईएसजी फैक्टरों पर फोकस करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने डेटा प्रकटीकरण और ग्रीनवॉशिंग के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाने की जरूरत पर जोर दिया, ताकि कंपनियों की प्रतिष्ठा बनी रहे और हितधारकों को अपेक्षित परिणाम मिल सकें।
कार्यक्रम के प्रारंभ में भारतीय निर्यात-आयात बैंक की प्रबंध निदेशक, सुश्री हर्षा बंगारी ने अपने संबोधन में कहा कि 1986 में शुरू हुई स्थापना दिवस वार्षिक व्याख्यान माला का यह 37वां वर्ष है और यह व्याख्यान माला वैश्विक व्यापार, निवेश और अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़े समकालीन विषयों पर सार्थक चर्चा के मंच के रूप में उभरी है। उन्होंने कहा कि प्रो. होंडा का व्याख्यान विशेष रूप से प्रासंगिक है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर हरित (ग्रीन बॉन्ड), सामाजिक बॉन्ड और सस्टैनेबिलिटी से जुड़े इंस्ट्रूमेंट्स का विस्तार तेजी से हो रहा है। उन्होंने बदलते वैश्विक डायनैमिक्स के बीच सस्टैनेबिलिटी पर एक्ज़िम बैंक के बढ़ते फोकस को भी रेखांकित किया।
वित्तीय सेवाएं विभाग, वित्त मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव, श्री एम. नागराजू ने अपने विशेष संबोधन में कहा कि 2070 के शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सार्वजनिक और निजी, दोनों क्षेत्रों से संपोषी वित्त जुटाना अहम होगा। उन्होंने उल्लेख किया कि शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत को लगभग 22.7 ट्रिलियन यूएस डॉलर के संचयी निवेश की आवश्यकता होगी। उन्होंने हरित वित्त (ग्रीन फायनैंसिंग) और संपोषी निवेश को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार द्वारा की गई पहलों को भी रेखांकित किया।
कार्यक्रम के अंत में भारतीय निर्यात-आयात बैंक की उप प्रबंध निदेशक, सुश्री दीपाली अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि प्रो. होंडा के इस व्याख्यान में ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य, विश्लेषणात्मक दृढ़ता और व्यावहारिक प्रासंगिकता का संतुलित संयोजन रहा। उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया कि संपोषी निवेश की चुनौतियों पर प्रो. होंडा का विश्लेषण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में संपोषी बॉन्ड के निर्गमकर्ता के रूप में एक्ज़िम बैंक के अपने अनुभवों की याद दिलाता है।
