भारत से 2030 तक 75 बिलियन यूएस डॉलर का हो सकता है रत्न और आभूषणों का निर्यातः एक्ज़िम बैंक और जीजेईपीसी का संयुक्त अध्ययन
एक्ज़िम बैंक और रत्न और आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) ने मिलकर ‘मेकिंग जेम्स एंड जूलरी क्लस्टर्स एक्सपोर्टेबल’ शीर्षक से एक अध्ययन किया है। इस अध्ययन के अनुसार, भारत यदि रत्न और आभूषणों के क्षेत्र में नीतियों, बुनियादी ढांचे, तकनीक और वित्त को बेहतर करने के लिए क्लस्टर‑केंद्रित रणनीति अपना ले, तो 2030 तक देश से रत्नों और आभूषणों का निर्यात बढ़कर 75 बिलियन यूएस डॉलर तक पहुंच सकता है।
रत्न और आभूषण क्षेत्र में अपनी तरह का यह पहला अध्ययन है, जिसमें निर्यात की उच्च संभावनाओं वाले जिला स्तर के 17 क्लस्टरों को चिह्नित और बेंचमार्क किया गया है। इनमें मुंबई उपनगरीय क्षेत्र सबसे बेहतर क्लस्टर बन गया है, वहीं सूरत, मुंबई, कोलकाता और जयपुर प्रमुख अग्रणी क्लस्टरों के रूप में चिह्नित किए गए हैं।
इस शोध अध्ययन के अनुसार, भारत के रत्न और आभूषण क्षेत्र में अभी भी 38 बिलियन यूएस डॉलर के अप्रयुक्त निर्यात की संभावनाएं हैं। इस अवसर को भुनाने के लिए, शोध अध्ययन में सुझाया गया है कि भारत उच्च मूल्य‑वर्धित उत्पादों में विविधता लाने पर विचार कर सकता है। इसके लिए हीरों के आभूषण, सोने के हल्के वजन वाले आभूषण, लग्ज़री स्मार्ट जूलरी, नकली (इमिटेशन) आभूषण, सिंथेटिक रत्न, ज्योतिष विद्या से प्रेरित डिज़ाइन और पारंपरिक स्वरूप वाले मोतियों के आभूषण बनाने और इनके निर्यात पर विचार किया जा सकता है। साथ ही, इस शोध अध्ययन में बाजारों के विविधीकरण पर भी जोर दिया गया है। रत्न और आभूषण के निर्यात के लिए वियतनाम, सिंगापुर, थाइलैंड, बोत्सवाना, रूस और श्रीलंका जैसे उभरते बाजारों पर विशेष रूप से फोकस किया जा सकता है। साथ ही, इसमें सिंगापुर और यूरोपीय संघ जैसे विकसित बाजारों में भी नए अवसर तलाशने का सुझाव दिया गया है।
इस शोध अध्ययन में, नीतिगत सहयोग को सुदृढ़ बनाने के लिए राज्य स्तर पर दी जाने वाली पूंजीगत सब्सिडी, एसजीएसटी प्रतिपूर्ति जैसी प्रोत्साहन योजनाओं को बढ़ाने और मंजूरियों की प्रक्रिया को तेज एवं सरल करने की अनुशंसा की गई है। इसके साथ ही, नवाचार को बढ़ावा देने के लिए डिजाइन आधारित प्रोत्साहन योजना शुरू करने का सुझाव भी दिया गया है। इसमें इन्फ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ बनाना भी एक अहम पहलू है। इसके अंतर्गत जन सुविधा केंद्रों के लिए हब-एंड-स्पोक मॉडल अपनाने, कोच्चि और चेन्नै के एसईज़ेड को और सुदृढ़ बनाने तथा सूरत और जयपुर में एसईज़ेड बढ़ाने की अनुशंसा की गई है। इसके अलावा, आगरा और त्रिचुर जैसे विनिर्माण क्लस्टरों में अंतरराष्ट्रीय हवाई मार्गों की बेहतर कनेक्टिविटी की आवश्यकता पर भी बल दिया गया है।
इस शोध अध्ययन में कस्टम्स से जुड़ी कई महत्त्वपूर्ण समस्याओं को भी चिह्नित किया गया है। शोध में कई समस्याओं का उल्लेख किया गया है, जैसे जयपुर में सामान संभालने वालों (कस्टोडियंस) को एयरसाइड तक जाने की अनुमति नहीं होती है, जिससे सामान की प्रोसेसिंग धीमी हो जाती है। अहमदाबाद और राजकोट में जांच और मूल्यांकन की सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं, इसलिए निर्यात में देरी होती है और जोखिम आधारित सैंपलिंग की भी कमी है। निर्यात प्रक्रिया को तेज और सुगम बनाने की आवश्यकता को भी शोध अध्ययन में रेखांकित किया गया है।
इस शोध अध्ययन में, ब्रांडिंग और मार्केटिंग के लिए उद्योग क्षेत्र के मौजूदा भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग का बेहतर उपयोग करने और निर्यात की बेहतर संभावनाओं वाले उत्पादों को जीआई टैग लेने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा, ई‑कॉमर्स निर्यातों को बढ़ावा देने के लिए अलग से लॉजिस्टिक्स केंद्र विकसित करने और रिटर्न प्रक्रिया को सरल बनाने की भी अनुशंसा की गई है।
इस शोध अध्ययन में, तकनीकी विकास के लिए एक विशेष तकनीकी उन्नयन निधि सृजित करने और इस क्षेत्र में शोध एवं अनुसंधान को बेहतर करने के लिए उद्योग तथा शैक्षणिक संस्थानों के बीच साझेदारी को सुदृढ़ करने का भी सुझाव दिया गया है। इस क्षेत्र में मौजूदा कौशल की बढ़ती आवश्कता को देखते हुए, इस अध्ययन में मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण केंद्र खोलने, प्रशिक्षण के अवसर बढ़ाने और दस्तकारों के लिए डिजिटल कौशल रजिस्टर बनाने की आवश्यकता पर बल दिया गया है, जिससे अपेक्षित मांग की आपूर्ति की जा सके।
इसमें कच्चे माल तक पहुंच को सुगम बनाने के लिए कुछ रणनीतियां भी रेखांकित की गई है। इसमें छोटे‑छोटे आकार का ड्यूटी‑फ्री सोना उपलब्ध कराने के लिए और ज्यादा बैंकों को अधिकृत करने का सुझाव दिया गया है। साथ ही, रंगीन रत्नों से जुड़े कस्टम्स के नियमों को भी सरल बनाने की आवश्कता को रेखांकित किया गया है। विशेषकर एमएसएमई के लिए वित्तीय सहयोग को बेहतर बनाने के लिए, इस शोध अध्ययन में निर्यात फैक्टरिंग और आपूर्ति शृंखला वित्तीय समाधान जैसे वित्तीय उत्पादों के बारे में जागरूकता बढ़ाने की भी अनुशंसा की गई है, ताकि छोटे व्यवसायों को भी पूंजी और वित्तीय सुविधाएं सुलभ हो सकें।
इस शोध अध्ययन का विमोचन, 8 जनवरी, 2026 को आयोजित इंडिया इंटरनैशनल जूलरी शो (आईआईजेएस) सिग्नेचर 2026 के दौरान डी बीयर्स ब्रांड्स की मुख्य कार्यकारी अधिकारी, सुश्री सॉन्द्रीन कॉन्सियेर, एक्ज़िम बैंक की प्रबंध निदेशक, सुश्री हर्षा बंगारी और कैरेटलेन के प्रबंध निदेशक, श्री सौमेन भौमिक द्वारा किया गया। इस अवसर पर जीजेईपीसी के अध्यक्ष, श्री किरीट भंसाली, उपाध्यक्ष एवं नैशनल एग्ज़िबिशंस के संयोजक, श्री शौनक पारीख, कार्यकारी निदेशक, श्री सब्यसाची रे, एक्ज़िम बैंक की उप प्रबंध निदेशक, सुश्री दीपाली अग्रवाल तथा वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग की पूर्व प्रधान आर्थिक सलाहकार, श्रीमती रूपा दत्ता उपस्थित रहीं।
एक्ज़िम बैंक की प्रबंध निदेशक, सुश्री हर्षा बंगारी ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था, निर्यात और रोजगार में रत्न और आभूषण क्षेत्र की अहम भूमिका है। सुश्री बंगारी ने क्लस्टर स्तर पर इस क्षेत्र का गहराई से मूल्यांकन करने में एक्ज़िम बैंक और जेजीईपीसी के साझा प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने यह भी कहा कि यह अध्ययन नीति‑निर्माताओं, उद्योग से जुड़े हितधारकों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए एक महत्त्वपूर्ण मार्गदर्शक साबित होगा, जिससे भारत की रत्न और आभूषण निर्यात क्षमता को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।
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श्री गौरव भंडारी,
मुख्य महाप्रबंधक,
भारतीय निर्यात-आयात बैंक,
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