डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया और स्टार्ट-अप इंडिया के लिए नया लक्ष्यः डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग
कोविड-19 से पहले और बाद के दौर में भारत में डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग के विकास की पड़ताल करता इंडिया एक्ज़िम बैंक द्वारा गेटवे हाउस के साथ मिलकर किया गया शोध अध्ययन
मुंबई, 11 मार्च, 2021:कोविड-19 महामारी के चलते, पूरी दुनिया में डिजिटल क्षेत्र में तेज़ी आई है और इसमें भारत की मुख्य भागीदारी रही है। चीन से दूरी बनाते हुए आपूर्ति श्रृंखलाओं में संभावित परिवर्तन कर भारत अपने डिजिटलीकरण प्रयासों के जरिए विनिर्माण को आधुनिक बना सकता है। “भारत में डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग” विषय पर प्रोग्रेसिव पॉलिसी इन्स्टीट्यूट, वॉशिंगटन डीसी के सहयोग से भारतीय निर्यात-आयात बैंक (इंडिया एक्ज़िम बैंक) द्वारा गेटवे हाउस के साथ मिलकर किए गए इस शोध अध्ययन में बताया गया है कि अपने डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग की गति बढ़ा लेने पर भारत किस तरह वैश्विक विनिर्माण केंद्र बन सकता है।
वर्तमान में, भारत में डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग, प्रौद्योगिकी में वैश्विक प्रयासों के अनुरूप है, पर अभी इसमें व्यापार और निवेश सीमित है। भारत में डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग में गति लाने के लिए इसमें व्यापार और निवेश को बढ़ाना आवश्यक है, खासकर इसे छोटे और मध्यम उद्यमों द्वारा व्यापक रूप से अपनाया जाना जरूरी है। गेटवे हाउसः भारतीय वैश्विक संबंध परिषद की कार्यकारी निदेशक और सह-संस्थापक सुश्री मंजीत कृपलानी ने कहा कि “आने वाले समय में व्यापार के वैश्वीकरण में डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग की भूमिका बहुत महत्त्वपूर्ण होगी। महामारी का दौर खत्म हो जाने के बाद इससे व्यापार लागत में कमी लाने में तो मदद मिलेगी ही, साथ ही डिजिटल उपकरणों के बेहतर उपयोग से उद्योग क्षेत्र को आधुनिक बनाने और बेहतर नौकरियों के सृजन में भी मदद मिलेगी। डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग भारत को तकनीकी रूप से आगे ले जाने वाला अगला कदम है, क्योंकि भारत 1990 के दशक में भी सॉफ्टवेयर आउटसोर्सिंग में अग्रणी रहा है। अब सरकार की कई प्रोत्साहन योजनाएं उद्योगों के अनुरूप हैं। भारत के पास विश्व स्तर पर खुद को पुनः प्रतिष्ठित करने और भविष्य में चौथी औद्योगिक क्रांति (उद्योग 4.0) में अग्रणी भूमिका निभाने का अवसर है।”
इस शोध अध्ययन का विमोचन 10 मार्च, 2021 को आयोजित एक ऑनलाइन सम्मेलन में इंडिया एक्ज़िम बैंक के प्रबंध निदेशक श्री डेविड रस्कीना द्वारा किया गया। इस दौरान भारत सरकार और इंडिया इंक के विशिष्ट प्रतिनिधि उपस्थित रहे। अपने संबोधन में श्री रस्कीना ने कहा ”परस्पर तेजी से जुड़ती और नजदीक आ रही दुनिया में नवप्रवर्तनों ने नए अवसर प्रदान किए हैं। पारंपरिक व्यवसायों को किफायती और प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के साथ-साथ, अपने ग्राहकों और हितधारकों की बदलती जरूरतों को पूरा करने के लिए डिजिटल उद्यमों में बदलाव लाना होगा। एक ऐसा डिजिटल परिवर्तन, जो रीयल टाइम हो, सहज हो, उपयोग करने में आसान हो, सुरक्षितऔर सुलभ हो। अपने व्यावसाय को निरंतर बढ़ाते रहने के लिए आधुनिक प्रतिस्पर्धी दुनिया में यह सब अनिवार्य है। भारतीय विनिर्माण क्षेत्र को बदलने के इस सफर में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की महत्त्वपूर्ण भूमिका होगी। ये उद्योग 4.0 के विकास में भी महती भूमिका निभाएंगे।”
इस अध्ययन में एक साल से अधिक समय तक किए गए शोध और फील्ड विजिट का सार है। ये शोध और फील्ड विजिट कोविड के पहले और बाद के दौर में डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग ईको सिस्टम पर केंद्रित रहे हैं। यह अध्ययन ऐसे समय में किया गया है, जब इस महामारी के चलते भारत के साथ-साथ विश्व स्तर पर डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग को तेजी से अपनाया जा रहा है। भारत, डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग के मामले में विभिन्न देशों से कई मायनों में आगे निकल गया है। कभी इसे एक विकल्प के रूप में देखने वाली कंपनियां अब इसे व्यावसायिक अनिवार्यता के रूप में देख रही हैं।
सुश्री कृपलानी ने कहा, “यह अध्ययन सरकार के मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया और स्टार्ट-अप इंडिया अभियानों के साथ-साथ माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल में बढ़ाए गए आत्मनिर्भर भारत अभियान के अनुरूप है। “यह शोध व्यवसाय और प्रौद्योगिकी को भारत की विदेश नीति के अनुरूप बनाते हुए वैश्विक मामलों में भारत की भूमिका को बढ़ाने के गेटवे हाउस के मिशन के भी अनुरूप है।“
इंडिया एक्ज़िम बैंक के उप प्रबंध निदेशक श्री एन. रमेश ने कहा, “भविष्य में, तकनीकी नवाचार के जरिए क्षमता और उत्पादकता तो बढ़ेगी ही, आपूर्ति क्षेत्र में भी ये नवाचार चमत्कारी रूप से कारगर साबित हो सकते हैं। शोध एवं विकास (आर एंड डी) में निवेश, विनिर्माण क्षेत्र को वांछित स्तर तक ले जाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही इससे उत्पादकता बढ़ाने और नवाचार-संचालित विकास में भी मदद मिलेगी।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि, "इंडिया एक्ज़िम बैंक अपने नए ‘उभरते सितारे कार्यक्रम’ के माध्यम से ऐसी भारतीय कंपनियों को चिह्नित करने और उन्हें सहयोग देने का प्रयास कर रहा है, जो मूलभूत रूप से मजबूत हैं। और चुनिंदा विनिर्माण तथा सेवा क्षेत्रों में अच्छी निर्यात क्षमता रखती हैं और भविष्य में चैंपियन हो सकती हैं। इस कार्यक्रम के तहत प्रौद्योगिकी, उत्पादों और प्रोसेस के मामलों में वैश्विक मानकों के अनुरूप विशिष्टता रखने वाली कंपनियों को सहायता प्रदान की जाती है।“
शोध अध्ययन में की गई प्रमुख अनुशंसाएं:
विश्व आर्थिक मंच के ‘लाइट हाउस नेटवर्क’ के समान एक विनिर्माण कौशल विकास कार्यक्रम बनाना, ताकि डिजिटलीकरण के लिए भारतीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को चिह्नित किया जा सके।
छोटे मार्केटिंग बजट में चलने वाले नवोद्यमों की बाजारों तक पहुंच बढ़ाने के लिए उनकी क्षमताओं को सरकारी पोर्टल पर मैप करते हुए उद्योग 4.0 नवोद्यमों की राष्ट्रीय डायरेक्ट्री का प्रकाशन करना।
शिक्षण संस्थानों और उद्योगों में तालमेल बढ़ाने के लिए एक ईकोसिस्टम तैयार करना, ताकि विनिर्माण उद्योगों के कामगारों और इन-हाउस फैकल्टी में क्षमता विकास किया जा सके।
भारतीय विनिर्माण बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा पूर्ण डिजिटलीकरण को अपनाना, ताकि उन्हें आपूर्ति श्रृंखलाओं में हो रहे वैश्विक परिवर्तन का लाभ मिल सके और भारतीय कंपनियां खुद को उद्योग 4.0 के अनुरूप विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित कर सकें।
पूरा शोध अध्ययन,‘भारत में डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग’ यहां उपलब्ध हैः
https://www.eximbankindia.in/research-papers
भारतीय निर्यात-आयात बैंक के बारे में:
भारतीय निर्यात-आयात बैंक (इंडिया एक्ज़िम बैंक) भारत सरकार के पूर्ण स्वामित्व वाली देश की शीर्ष निर्यात वित्त संस्था है। इसकी स्थापना 1982 में भारत के अंतरराष्ट्रीय व्यापार के वित्तपोषण, सुगमीकरण तथा संवर्धन के उद्देश्य से की गई है। बैंक, द्विपक्षीय व्यापार और निवेश के वित्तपोषण के लिए विभिन्न ऋण कार्यक्रमों के परिचालन के अतिरिक्त, भारतीय कंपनियों में निर्यात क्षमताएं विकसित करने और उन्हें बढ़ाने में संवर्धक की भूमिका भी निभाता है। बैंक पिछले कई वर्षों से, विश्व स्तर पर भारत सरकार की आर्थिक नीति के कार्यान्वयन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
इंडिया एक्ज़िम बैंक का शोध एवं विश्लेषण समूह, क्वालिटेटिव और क्वांटिटेटिव रिसर्च के जरिए अन्य के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं निवेश से संबंधित विभिन्न विषयों, क्षेत्रगत विश्लेषण और नीति संबंधी मसलों पर विस्तृत शोध अध्ययन करता है और इन विषयों पर जानकारियां प्रदान करता है। ये शोध अध्ययन भारत के अंतरराष्ट्रीय व्यापार को समझने में अहम भूमिका निभाते हैं।
गेटवे हाउसः भारतीय वैश्विक संबंध परिषद के बारे में:
गेटवे हाउसः भारतीय वैश्विक संबंध परिषद मुंबई स्थित विदेश नीति थिंक टैंक है। इसकी स्थापना भारत की अग्रणी कंपनियों और व्यक्तियों को भारत की विदेश नीति तथा वैश्विक मामलों में देश की भूमिका पर विमर्श में शामिल करने के उद्देश्य से की गई थी। गेटवे हाउस स्वतंत्र, निष्पक्ष और सदस्यता आधारित संस्था है, जो भारत के लिए महत्त्व रखने वाले वैश्विक मामलों पर विभिन्न परिप्रेक्ष्य बनाने की दिशा में इस प्रकार काम करता है कि भारत वैश्विक नियमों के पालनकर्ता देश से वैश्विक नियम निर्माता के रूप में स्थापित हो सके।
हमारे प्रमुख शोध अध्ययन क्षेत्र हैं: भू-राजनीति, भू-अर्थशास्त्र, ऊर्जा और पर्यावरण, अंतरिक्ष और महासागरीय अध्ययन, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा (समुद्री, साइबर और डिजिटल), अंतरराष्ट्रीय कानून और बॉम्बे का इतिहास।
अधिक जानकारी के लिए कृपया संपर्क करें:
श्री डेविड सिनाटे,
मुख्य महाप्रबंधक,
भारतीय निर्यात-आयात बैंक,
8वीं मंज़िल, मेकर चेंबर IV, जमनालाल बजाज मार्ग, नरीमन पॉइंट,
मुंबई 400 021.
ईमेलः dsinate@eximbankindia.in
फोनः +91-22-22860353
