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एक्ज़िम बैंक ने निर्यात प्रोत्साहन मिशन के तहत योजनाओं के लिए जारी किए दिशानिर्देश - ‘उभरते निर्यात अवसरों के लिए सहायता’ और ‘ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए ऋण सहायता’


 

केंद्र सरकार ने केंद्रीय बजट 2025-26 में निर्यात प्रोत्साहन मिशन (ईपीएम) की घोषणा की थी। यह मिशन वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय और वित्त मंत्रालय के संयुक्त प्रयास से संचालित है। विकास वित्त संस्था के रूप में, भारत के अंतरराष्‍ट्रीय व्यापार के वित्तपोषण, सुगमीकरण और संवर्धन करने वाले भारतीय निर्यात-आयात बैंक (एक्ज़िम बैंक) को राष्‍ट्रीय क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (NCGTC) के साथ मिलकर ईपीएम के तहत दो योजनाओं के कार्यान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ये योजनाएं हैं- ‘उभरते निर्यात अवसरों के लिए सहायता’ और ‘ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए ऋण सहायता’।


‘उभरते निर्यात अवसरों के लिए सहायता’ योजना के तहत एक्ज़िम बैंक के ‘व्यापार सहायता कार्यक्रम’ (टैप) को विस्तार दिया गया है। यह भारत में अपनी तरह की पहली व्यापार सुगमीकरण पहल है। निर्यातकों को अक्सर नए या उच्च जोखिम वाले बाजारों में खरीदारों के साथ ट्रांज़ैक्शन के दौरान साख पत्र (लेटर ऑफ क्रेडिट - एलसी) की पुष्‍टि में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। वहीं, इन बाज़ारों में ट्रांज़ैक्शनों को सहायता प्रदान करने के लिए बैंकों की जोखिम उठाने की क्षमता भी सीमित रहती है। इस पृष्‍ठभूमि में, यह योजना एलसी आधारित ट्रांज़ैक्शनों के लिए गारंटी प्रदान करती है। इससे व्यापार भुगतानों में भरोसा बढ़ेगा। बैंकों की क्षमता बढ़ेगी और वे ऐसे बाजारों में अंतरराष्‍ट्रीय ट्रांज़ैक्शनों को सहायता प्रदान करने में सक्षम होंगे, जहां ऐसे सहयोग के अभाव में ये ट्रांज़ैक्शन नहीं हो पाते। साथ ही, भारतीय बैंकों और विदेशी स्थानीय बैंकों के बीच साझेदारी को भी बढ़ावा मिलेगा। इस योजना के लिए विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने 6 मार्च, 2026 को ट्रेड नोटिस संख्या 32/2025-26 जारी किया है।


‘ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए ऋण सहायता’ योजना का उद्देश्य ई-कॉमर्स के माध्यम से निर्यात करने वाले सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए कार्यशील पूंजी को सुलभ बनाना है। इससे ये इकाइयां निर्यात मांग को ध्यान में रखते हुए पहले से उत्पादन कर सकेंगी और वैश्‍विक बाजारों में अपनी भागीदारी बढ़ा सकेंगी। योजना के तहत, पात्र इकाइयों को दिए जाने वाले ऋण पर बैंकों को क्रेडिट गारंटी कवर प्रदान किया जाएगा। यह सहायता पात्र लाभार्थियों को कवरेज मानदंडों के अनुसार कैश क्रेडिट, ओवरड्राफ्ट या अन्य कार्यशील पूंजी सुविधाओं के रूप में दी जाएगी। इन सुविधाओं पर अधिसूचित सीमा के अनुसार ब्याज अनुदान भी उपलब्ध होगा। इस योजना के लिए डीजीएफटी ने 6 मार्च, 2026 को ट्रेड नोटिस संख्या 31/2025-26 जारी किया है।


इन दोनों योजनाओं के तहत, एक्ज़िम बैंक द्वारा एमएसएमई निर्यातकों को सहयोग प्रदान किया जाएगा। यह सहयोग वाणिज्यिक बैंकों के लिए पूरक के रूप में कार्य करेगा। क्योंकि इन योजनाओं के तहत जोखिम कम किया जाएगा और ऐसे क्षेत्रों में वित्तपोषण को सुगम बनाया जाएगा, जहां पारंपरिक ऋण माध्यम बहुत सीमित हैं। यह सहायता विशेष रूप से नए और ऐसे निर्यातकों के लिए उपयोगी होगी, जिनकी पहुंच ऋण तक बहुत सीमित रही है। साथ ही, यह उच्चतर जोखिम वाले बाज़ारों और निर्यातों के नए माध्यम अपनाने वाले निर्यातकों के लिए भी उपयोगी होगी। एक्ज़िम बैंक ने इन योजनाओं के तहत ऋण देने वाली संस्थाओं के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन दिशानिर्देशों की प्रतियां संलग्‍नक में हैं।


बैंक ने एक अलग पोर्टल (tap.eximbankindia.in) भी विकसित किया है। यह एक सिंगल विंडो डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में काम करेगा। इस पर ऋणदाता संस्थाएं प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकेंगी। इसी पर आवश्यक दस्तावेज अपलोड किए जा सकेंगे। आवेदन की स्थिति ट्रैक की जा सकेगी। और गारंटी सहायता प्राप्त की जा सकेगी। इस प्लेटफॉर्म के जरिए एक्ज़िम बैंक, वाणिज्यिक बैंकों और एनसीजीटीसी के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्‍चित किया जा सकेगा।


‘उभरते निर्यात अवसरों के लिए सहायता’ योजना संबंधी दिशानिर्देश
‘ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए ऋण सहायता’ योजना संबंधी दिशानिर्देश


विस्तृत जानकारी के लिए कृपया संपर्क करें: : 
सुश्री तृप्ति म्हात्रे, 
महाप्रबंधक, 
भारतीय निर्यात-आयात बैंक, केंद्र एक भवन, 
21वीं मंज़िल, विश्‍व व्यापार केन्द्र संकुल, कफ़ परेड, मुंबई 400 005;  
फोनः : 91-22-2217 2308; 
ईमेलः : trupti[at]eximbankindia[dot]in 
पोर्टल: tap.eximbankindia.in