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एक्ज़िम बैंक के ऋणों में 11.87% और कर पश्‍चात लाभ में हुई 31.74% की बढ़ोतरी


एक्ज़िम बैंक (बैंक) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए वित्तीय परिणामों की घोषणा कर दी है। इन्हें बैंक के बोर्ड द्वारा 8 मई, 2026 को अंगीकृत किया गया। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए बैंक के वित्तीय परिणामों की खास बातें निम्‍नलिखित अनुसार हैं:


वित्तीय कार्य निष्पादन  
 

मानदंड2024-25 में निष्पादन2025-26 में निष्पादन2024-25 से परिवर्तन
A. कुल व्यवसाय (` करोड़)3,97,8634,50,80413.31%
   निवल ऋण पोर्टफोलियो1,85,7392,07,77911.87%
   कुल उधारियां1,79,1812,05,30614.58%
B. कर पश्‍चात लाभ (` करोड़)3,2434,27331.74%
C. सकल अनर्जक आस्तियां1.71%0.57%-114 bps
D. निवल अनर्जक आस्तियां0.14%0.01%-13 bps
E. जोखिम भारित पूंजी आस्ति अनुपात25.29%26.39%110 bps

व्यवसाय निष्पादन 
बैंक ने प्रमुख व्यवसाय निष्पादन मानदंडों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की, जो भारत के व्यापार और निवेश तथा सहभागी देशों की विकास प्राथमिकताओं को सहायता प्रदान करने की बैंक की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। भारत की विकास यात्रा और ऋण की बढ़ी मांग के बीच, बैंक ने ` 1,55,761 करोड़ के नए ऋणों को मंजूरी दी। यदि बैंक की आस्ति गुणवत्ता यानी ऋणों की गुणवत्ता की बात की जाए तो यथा 31 मार्च, 2026 को सकल एनपीए कुल ऋणों और अग्रिमों का 0.57 प्रतिशत रहा। वहीं, यथा 31 मार्च, 2026 को निवल एनपीए (प्रावधानों को घटाकर) में भी सुधार हुआ और ये कुल ऋणों और अग्रिमों (प्रावधानों को घटाकर) के 0.01 प्रतिशत रहे। यथा 31 मार्च, 2026 को प्रावधान कवरेज अनुपात 99.85 प्रतिशत रहा।


संसाधन 
बैंक ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान, भारतीय रुपये में ` 65,315 करोड़ के संसाधन और 2.17 बिलियन यूएस डॉलर के समतुल्य विदेशी मुद्रा संसाधन जुटाए। वर्ष के दौरान उल्लेखनीय ट्रांज़ैक्शनों में बैंक ने 2026 में खुले यूएस डॉलर बॉन्ड निर्गम बाजार में कदम रखा। यह किसी भारतीय बैंकिंग वित्तीय संस्था द्वारा अंतरराष्‍ट्रीय बाजारों में पहला 30 वर्षीय यूएस डॉलर बॉन्ड रहा। इस तरह बैंक ने भारतीय निर्गमकर्ताओं के लिए एक नया दीर्घकालिक बेंचमार्क तैयार किया और अपने क्रेडिट कर्व को भी दीर्घकालिक बनाया। यह ट्रांज़ैक्शन किसी 10 वर्षीय बॉन्ड के लिए सबसे कम स्प्रैड (10 वर्षीय यूएस ट्रेज़री बेंचमार्क पर 85 बीपीएस) वाला रहा। साथ ही, यह 30 वर्षीय बॉन्ड के लिए भी सबसे कम स्प्रैड (30 वर्षीय यूएस ट्रेज़री बेंचमार्क पर 95 बीपीएस) वाला रहा। बैंक को मूडीज़ द्वारा बीएए3 (स्थिर), एस एंड पी ग्लोबल रेटिंग्स द्वारा बीबीबी- (पॉज़िटिव), फिच रेटिंग्स द्वारा बीबीबी- (स्थिर) और जापान क्रेडिट रेटिंग एजेंसी द्वारा बीबीबी+ (स्थिर) रेटिंग दी गई है। ये सभी रेटिंग निवेश ग्रेड या इससे ऊपर की हैं और संप्रभु रेटिंग के समान हैं।


पॉलिसी व्यवसाय 
वर्तमान में, बैंक की भारत सरकार समर्थित 307 ऋण-व्यवस्थाएं हैं। इनके अंतर्गत कुल 27.5 बिलियन यूएस डॉलर की ऋण प्रतिबद्धताएं हैं, जो क्रियान्वयन के विभिन्‍न चरणों में हैं। ये ऋण-व्यवस्थाएं अपनी बढ़ती पहुंच के साथ सहभागी देशों में सामाजिक-आर्थिक विकास की वाहक रही हैं। इन ऋण-व्यवस्थाओं ने अफ्रीका, एशिया, लैटिन अमेरिका, ओशिआनिया और पूर्वी यूरोप में 63 देशों के आर्थिक विकास को गति देने में योगदान दिया है। इन ऋण-व्यवस्थाओं के जरिए भारतीय कॉन्ट्रैक्टरों और आपूर्तिकर्ताओं को वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात में तो मदद मिली ही है, साथ ही ये ऋण-व्यवस्थाएं भारत की परियोजना निष्पादन क्षमताओं की मिसाल रही हैं और भारत को दुनिया के एक विश्‍वसनीय विकास भागीदार के रूप में स्थापित करने वाली रही हैं। वर्ष के दौरान, बैंक ने मालदीव सरकार के साथ ` 4,850 करोड़ के एक ऋण-व्यवस्था करार पर हस्ताक्षर किए। यह ऋण-व्यवस्था विभिन्‍न विकास परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए दी गई है। साथ ही, यह भारतीय रुपये में भारत सरकार समर्थित पहली ऋण-व्यवस्था है।


वाणिज्यिक व्यवसाय
वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान, बैंक ने भारतीय कंपनियों में निर्यात क्षमता सृजन और उनकी निर्यात स्पर्धात्मकता बढ़ाने और उनके वैश्‍वीकरण प्रयासों में सहयोग के क्रम में, ` 1,50,911 करोड़ की सहायता प्रदान की। वर्ष के दौरान, कॉर्पोरेट ऋणों में 31% की वृद्धि दर्ज की गई और आस्ति गुणवत्ता अच्छी रही। बैंक ने भारत के परियोजना निर्यातों को नई ऊंचाई पर पहुंचाते हुए 49 देशों में ` 69,607 करोड़ के 142 परियोजना निर्यात कॉन्ट्रैक्टों को सहायता प्रदान की। इसके अलावा, राष्‍ट्रीय निर्यात बीमा खाते के अंतर्गत क्रेता ऋण के तहत बैंक द्वारा अब तक 14 देशों में 2.55 बिलियन यूएस डॉलर की 28 परियोजनाओं के लिए सहायता प्रदान की जा चुकी है। बैंक द्वारा अब तक 541 भारतीय कंपनियों को 80 देशों में 743 संयुक्त उद्यम / सहायक कंपनियां स्थापित करने के लिए वित्त प्रदान किया जा चुका है।


सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को सहायता
बैंक के विभिन्‍न कार्यक्रमों के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान 500 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को सहायता प्रदान की गई। बैंक की हालिया पहलें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र के लिए मार्केट गैप को कम करने में उल्लेखनीय भूमिका निभा रही हैं। साथ ही, इनके जरिए सुनिश्‍चित किया जा रहा है कि अर्थक्षम परियोजनाएं या उद्यम, विभिन्‍न जोखिमों या बाजार तक पहुंच में आने वाली चुनौतियों को दूर कर पाएं। बैंक का व्यापार सहायता कार्यक्रम (टैप) ट्रेड ट्रांज़ैक्शनों में वित्त की कमी को दूर कर रहा है और सहभागी देशों तथा भारत में स्थानीय बैंकों के बीच पुल का काम कर रहा है। 2022 में टैप की शुरुआत से बैंक द्वारा अब तक इस कार्यक्रम के अंतर्गत विदेशों में 160 से अधिक बैंकों के साथ भागीदारी की जा चुकी है। यथा 31 मार्च, 2026 को बैंक द्वारा टैप के अंतर्गत 60 देशों में 2,500 से अधिक ट्रांज़ैक्शनों को सहायता प्रदान की गई। इससे 22 राज्यों के 60 शहरों के 240 से अधिक निर्यातकों द्वारा नए या चुनौतीपूर्ण बाजारों में 3.94 बिलियन यूएस डॉलर से अधिक के अतिरिक्त निर्यात संभव हुए।


गिफ्ट सिटी में अगस्त 2023 में स्थापित एक्ज़िम बैंक की सहायक कंपनी, इंडिया एक्ज़िम फिनसर्व आईएफएससी प्राइवेट लिमिटेड ने दुनियाभर में 64 आयातकों को कवर करते हुए लगभग 36.81 मिलियन यूएस डॉलर की प्रतिबद्धताओं के साथ 26 निर्यातकों को फैक्टरिंग सीमाएं मंजूर की। इनमें से लगभग 58 प्रतिशत मंजूरियां एमएसएमई निर्यातकों दी गईं। इनमें उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्‍ट्र, पश्‍चिम बंगाल, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, गोवा तथा दिल्ली के निर्यातक शामिल रहे। इन्हें उत्तरी अमेरिका, यूरोप, मध्य पूर्व, एशिया-प्रशांत तथा लैटिन अमेरिका के बाजारों में निर्यातों के लिए सहायता प्रदान की गई। इन 26 आपूर्तिकर्ताओं में से 19 निर्यातक इकाइयां फैक्टर की गईं, जिससे 2,350 ट्रांज़ैक्शनों में 44.28 मिलियन यूएस डॉलर का संचयी इनवॉयस टर्नओवर रहा।


इसके अलावा, बैंक अपने उभरते सितारे कार्यक्रम (यूएसपी) के अंतर्गत मध्यम आकार वाली ऐसी कंपनियों को नए मुकाम हासिल करने मदद कर रहा है, जो अलग तकनीक, उत्पाद या प्रोसेस के लिहाज से तो अच्छी स्थिति में हैं, लेकिन अभी अंडरपरफॉर्मिंग हैं या अपनी क्षमताओं का पूरी तरह उपयोग नहीं कर पा रही हैं। यथा 31 मार्च, 2026 को यूएसपी के अंतर्गत बैंक ने 10 इक्‍विटी निवेशों सहित 105 कंपनियों को कुल ₹ 2,111 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान की। इनमें सस्टैनेबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए नवोन्मेषी समाधानों वाली 18 कंपनियां, अत्याधुनिक तकनीक में दुनिया को नई राह दिखा रही 20 कंपनियां, स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में क्रांतिकारी काम कर रही 16 कंपनियां और ई-मोबिलिटी समाधानों, विशेषीकृत मध्यवर्ती वस्तुओं, सॉफ्टवेयर समाधानों, वैश्‍विक ब्रांडों आदि के लिए उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद बनाने वाली अन्य कंपनियां शामिल हैं। बैंक ने अग्रणी अकादमिक संस्थानों के साथ भी अपनी भागीदारी को सुदृढ़ किया है। इस क्रम में बैंक ने ऐसी कंपनियों को अपना व्यवसाय बढ़ाने के लिए आईआईटी मुंबई, आईआईटी दिल्ली, आईआईएम अहमदाबाद और भारतीय विज्ञान संस्थान, बैंगलोर, आईआईएम लखनऊ और आईआईटी कानपुर के इन्क्यूबेटरों को तकनीकी सहायता प्रदान की है, जो अभी अपने प्रारंभिक चरण में हैं।


अपनी नीतिगत भूमिका में, बैंक को भारत सरकार के निर्यात प्रोत्साहन मिशन के अंतर्गत दो योजनाओं के लिए कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में नामित किया गया है। ये योजनाएं हैं, ‘उभरते निर्यात अवसरों के लिए सहायता, तथा ‘ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए ऋण सहायता’। इन योजनाओं के तहत बैंक एमएसएमई निर्यातकों को सहायता प्रदान करेगा और वाणिज्यिक बैंकों के लिए पूरक की भूमिका निभाएगा तथा जोखिम को कम करने के इंस्ट्रूमेंट उपलब्ध कराते हुए उन क्षेत्रों में वित्तपोषण का सुगमीकरण करेगा, जहां पारंपरिक माध्यमों से ऋण बहुत सीमित हैं। यह सहायता विशेष रूप से उन निर्यातकों के लिए महत्त्वपूर्ण होगी, जो नए या उच्च जोखिम वाले बाजारों में प्रवेश करना चाह रहे हैं। साथ ही, यह सहायता ऐसे निर्यातकों के लिए भी उपयोगी होगी, जो निर्यात के नए माध्यमों की संभावनाएं तलाश रहे हैं। इसके अतिरिक्त, बैंक को ‘प्री एवं पोस्ट शिपमेंट रुपया निर्यात ऋण पर ब्याज समकरण योजना’ की कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में भी नामित किया गया है।


सस्टैनेबिलिटी पर फोकस
वर्ष के दौरान, बैंक ने अपने ईएसजी फ्रेमवर्क के अंतर्गत प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए 150 मिलियन यूएस डॉलर के दो संपोषी फ्लोटिंग रेट नोट जारी किए। बैंक ने अपने संपोषी वित्त कार्यक्रम के अंतर्गत सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, क्लीनटेक, संपोषी कृषि, संपोषी समाधानों आदि जैसे क्षेत्रों में 30 कंपनियों को ₹ 12,636 करोड़ की मंजूरियां प्रदान की।


संवर्धन एवं विकासपरक भूमिका 
बैंक ने भारत से निर्यातों को बढ़ावा देने के लिए अपनी पहलों और कार्यक्रमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से निर्यातकों, उद्यमियों, दस्तकारों, थिंक टैंकों, सरकारों आदि के लिए 30 लोकसंपर्क कार्यक्रमों का आयोजन किया। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य उद्यमियों को वैल्यू चेन में आगे बढ़ने में सहयोग करना और निर्यात आधारित विकास में योगदान देना है। बैंक ग्रासरूट उद्यमों को बेहतर विज़िबिलिटी देते हुए और उनके ब्रांड का प्रचार-प्रसार करते हुए विभिन्‍न बाजारों तक उनकी पहुंच बढ़ाने के लिए भी प्रतिबद्ध है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान, बैंक ने काला घोड़ा कला महोत्सव के साथ भी भागीदारी की और 20 राज्यों से 200 से अधिक दस्तकारों और ग्रासरूट उद्यमों को सहयोग प्रदान किया। वर्ष के दौरान, एक्ज़िम बैंक ने देशों/क्षेत्र, भारतीय राज्यों की निर्यात क्षमता, उद्योगों और अंतरराष्‍ट्रीय व्यापार से संबंधित विषयों पर 20 शोध अध्ययन प्रकाशित किए। इसके अलावा, बैंक ने मुक्त व्यापार करारों तथा निर्यात प्रोत्साहन मिशन के अंतर्गत व्यापार वित्त योजनाओं के संबंध में भारत सरकार को महत्त्वपूर्ण इनपुट भी प्रदान किए और सुविचारित निर्णय प्रक्रिया में योगदान दिया।


सामाजिक पहलें 
वर्ष के दौरान, बैंक ने भारत के पांच राज्यों में 14 सीएसआर पहलों के अंतर्गत 56,800 लाभार्थियों को सहयोग प्रदान किया। बैंक ने वंचित समुदायों के लिए स्वास्थ्य, स्वच्छता तथा पोषण सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण में योगदान दिया। इस क्रम में, बैंक ने सीएमसी वेल्लोर में एक आपातकालीन ऑपरेटिंग कक्ष को उपकरणों से लैस करने में सहयोग प्रदान किया। तिरुमलाई चैरिटी ट्रस्ट को चार डायलिसिस मशीनें उपलब्ध कराईं और रोगियों के डायलिसिस व्यय के वहन में सहयोग दिया। डॉ. माने मेडिकल फाउंडेशन एंड रिसर्च सेंटर के साथ मिलकर बैंक ने 40 दूरस्थ गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाने के लिए एक मोबाइल मेडिकल यूनिट की स्थापना में सहयोग प्रदान किया। इसके अतिरिक्त, बैंक ने महाराष्‍ट्र में दृष्‍टिबाधित बच्चों के लिए 34 विशेष विद्यालयों में सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनों और इन्सिनिरेटर की स्थापना में सहयोग प्रदान किया। साथ ही, महाराष्‍ट्र के परभणी जिले के 40 गांवों में पुनः उपयोग में आ सकने वाले सैनिटरी पैड्स के 22,156 पैकेट वितरित किए। शिक्षा क्षेत्र में भी बैंक द्वारा सहयोग प्रदान किया गया। इस क्षेत्र में उत्तरकाशी स्थित हिमालयन स्कूल ऑफ लाइफ में विद्यालयी बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण, उत्तर प्रदेश के रायबरेली स्थित गुरुकुल पब्लिक स्कूल में सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना के माध्यम से अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने तथा गुजरात स्थित भाषा रिसर्च एंड पब्लिकेशन सेंटर (वसंतशाला) के माध्यम से आदिवासी बालिकाओं की प्राथमिक शिक्षा के लिए दिए गए सहयोग शामिल हैं। बैंक की कौशल विकास तथा आजीविका संबंधी पहलों के अंतर्गत रोजगार-सुगमता को बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया। इसके तहत 400 युवाओं को ईवी सर्विसिंग तथा सोलर पीवी इंस्टॉलर ट्रेड्स में बाजार के अनुकूल प्रशिक्षण प्रदान किया गया। साथ ही, 120 युवाओं को टैली एवं हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट में कौशल विकास प्रशिक्षण दिया गया। इसके अलावा, बैंक ने पर्यावरणीय सस्टैनेबिलिटी और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग तथा अपशिष्‍ट प्रबंधन को बढ़ावा देते हुए अक्षय पात्र फाउंडेशन के सिलवासा स्थित किचन में बायोगैस संयंत्र की स्थापना में सहयोग प्रदान किया।


विस्तृत जानकारी के लिए कृपया संपर्क करें: 
श्री धर्मेंद्र सचान,
महाप्रबंधक,
भारतीय निर्यात-आयात बैंक,
21वीं मंज़िल, केंद्र एक भवन, विश्‍व व्यापार केंद्र संकुल, कफ़ परेड, मुंबई 400005; 
फोनः +91-22-22172829; 
ईमेल: info[at]eximbankindia[dot]in