भारत के लिए अफ्रीका में व्यवसाय बढ़ाने का अवसर है एएफसीएफटीएः इंडिया एक्ज़िम बैंक
भारत-अफ्रीका साझेदारी पर 15वें सीआईआई-एक्ज़िम बैंक डिजिटल कॉन्क्लेव के दौरान 22 सितंबर, 2020 को इंडिया एक्ज़िम बैंक के शोध अध्ययन “एएफसीएफटीएः अफ्रीका के आर्थिक एकीकरण में भारत के लिए अवसर” का विमोचन किया गया। इस दौरान भारत के माननीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, नाइजीरिया के उपराष्ट्रपति प्रो. येमी ओसिनबाजो, केन्या की विदेश मामलों की कैबिनेट सेक्रेट्री सुश्री रेशेल अवाउर ओमामो, मॉरीशस के उप प्रधानमंत्री डॉ. मोहम्मद अनवर हुसनू, भारतीय निर्यात-आयात बैंक के प्रबंध निदेशक श्री डेविड रस्कीना, कोटक महिंद्रा बैंक के प्रेसिडेंट श्री उदय कोटक, सीआईआई के महानिदेशक श्री चंद्रजीत बनर्जी और सीआईआई-अफ्रीका कमेटी के सह-अध्यक्ष श्री एस. कुप्पुस्वामी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
पिछले एक दशक के दौरान अफ्रीका का अंतः क्षेत्रीय व्यापार लगभग 14 प्रतिशत के आसपास ही रहा है। अफ्रीका ने अपने अंतः क्षेत्रीय व्यापार में आई इस मंदी पर ध्यान भी दिया है और आर्थिक एकीकरण के प्रयास भी तेज किए हैं। इसके लिए अफ्रीका ने अफ्रीकी महाद्वीप मुक्त व्यापार क्षेत्र (एएफसीएफटीए) करार भी किया है। यह करार 30 मई, 2019 से ही प्रभावी हुआ है। हालांकि एएफसीएफटीए के अंतर्गत व्यापार जुलाई 2020 से ही शुरू होना था। किन्तु कोविड-19 महामारी के चलते अब इसके 2021 से शुरू होने की उम्मीद है।
एक आकलन के अनुसार, एएफसीएफटीए के अंतर्गत अंतः अफ्रीकी व्यापार कम से कम 52.3 प्रतिशत बढ़ जाएगा। तथापि, यह करार कितना प्रभावी होगा, यह इस पर निर्भर करता है कि व्यापार संबंधी बुनियादी ढांचागत सुविधाओं में कितना सुधार आता है और ट्रांजिट लागतें कैसी रहती हैं।
भारत और अफ्रीका के बीच अच्छे व्यापार संबंध रहे हैं और यह साझेदारी समय के साथ मजबूत होती रही है। भारत 2017 से लगातार अफ्रीका का दूसरा सबसे बड़ा व्यापार भागीदार देश बना हुआ है। किन्तु अफ्रीका में शीर्ष 5 निवेशकों (एफडीआई स्टॉक की दृष्टि से) में भारत का नाम नहीं है। इसलिए भारत को अपनी विदेश नीति में एएफसीएफटीए को प्राथमिकता देने की महती आवश्यकता है। इसके लिए ऐसी रणनीतियां बनाने की जरूरत है जो अफ्रीकी महाद्वीप की विकासात्मक जरूरतों को पूरा कर सके।
इंडिया एक्ज़िम बैंक के इस शोध अध्ययन में, इस संबंध में तीन महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों को रेखांकित किया गया है, जिनमें भारत के लिए अफ्रीकी देशों के साथ भारत निवेश संबंध बढ़ाने के पर्याप्त अवसर हैं। एकीकरण से क्षेत्रीय वैल्य चेन के विकास की राह आसान होगी और वैश्विक वैल्यू चेन से अफ्रीका का एकीकरण होगा। इसके अलावा, अफ्रीका की बुनियादी ढांचागत सुविधाओं तथा कनेक्टिविटी में भी सुधार आएगा। अन्य के साथ-साथ, अफ्रीका में व्यापार वित्त की राह भी आसान हो सकेगी।
जीवीसी में अफ्रीका की वर्तमान स्थिति के मूल्यांकन के लिए इस अध्ययन में जीवीसी में अफ्रीका की हिस्सेदारी और जीवीसी में स्थिति का भी विश्लेषण किया गया है। अधिकतर अफ्रीकी अर्थव्यवस्थाओं की जीवीसी भागीदारी न्यून और जीवीसी स्थिति दर उच्च है। वजह है, उनका उच्च घरेलू वैल्यू-एडेड निर्यात (मुख्यतः प्राथमिक कमोडिटी) और अपस्ट्रीम गतिविधि (वैल्यू चेन का प्रारंभिक हिस्सा) में निवेश। इसलिए भारत का निजी क्षेत्र अफ्रीकी देशों को वैल्यू एडिशन और कृषि, विनिर्माण तथा सेवा वैल्यू चेन में एकीकरण में सहायक हो सकता है। कोविड-19 महामारी फैलने से अफ्रीका का एकीकरण और लचीली क्षेत्रीय वैल्यू चेन बनाना और भी महत्त्वपूर्ण हो गया है। इंडिया एक्ज़िम बैंक के इस अध्ययन में इस बात का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि भारत और अफ्रीका कृषि-प्रसंस्करण, फार्मासूटिकल, स्वास्थ्य सेवा और अक्षय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा सकते हैं, ताकि आर्थिक सुधार प्रक्रिया जारी रखी जा सके।
अध्ययन में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि अतः क्षेत्रीय व्यापार को सुगम बनाने में बुनियादी ढांचा बहुत महत्त्वपूर्ण होता है। अफ्रीका का वार्षिक बुनियादी ढांचा घाटा 67.6 से 107.5 बिलियन यूएस डॉलर के बीच आंका गया है। इसमें परिवहन और बुनियादी ढांचे संबंधी अन्य सुविधाएं भी शामिल हैं। इस संबंध में, बुनियादी ढांचागत विकास को सुगम बनाने और वित्तपोषण की परेशानी के समाधान हेतु निजी क्षेत्र की सहभागिता बढ़ाने के लिए परंपरागत वित्तपोषण के साथ-साथ नवोन्मेषी वित्तपोषण व्यवस्था को आजमाने की जरूरत बताई गई है। इसमें अन्य के साथ-साथ पीपीपी और ब्लेंडेड फायनैंस का विकल्प भी सुझाया गया है। इसके अलावा, विशेष रूप से लघु और मध्यम उद्यमों की व्यापार वित्त तक सीमित पहुंच की समस्या अफ्रीका के व्यापार में एक बड़ी बाधा है। अध्ययन में अफ्रीका में वित्तीय संस्थागत क्षमताओं को सुदृढ़ करने के लिए भारतीय वित्तीय संस्थाओं की सहभागिता बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया गया है।
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श्री डेविड सिनाटे
मुख्य महाप्रबंधक
शोध एवं विश्लेषण समूह
भारतीय निर्यात-आयात बैंक
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