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भारतीय पैकेजिंग क्षेत्र को बढ़ाएंगे ई-कॉमर्स और संगठित खुदरा व्यापारः एक्ज़िम बैंक का शोध अध्ययन

भारतीय निर्यात-आयात (इंडिया एक्ज़िम बैंक) बैंक द्वारा प्रकाशित शोध अध्ययन के अनुसार, 2016-21 के दौरान भारतीय पैकेजिंग क्षेत्र के 18% की सीएजीआर से बढ़ते हुए 2020 तक 72.6 बिलियन यूएस डॉलर का हो जाने की संभावना है। इसमें खाद्य पैकेजिंग उद्योग के 2020 तक 55 बिलियन यूएस डॉलर का हो जाने की उम्मीद है। बढ़ते शहरीकरण, युवा और मध्य आयु वर्ग के तेजी से उच्च आय वाली आबादी में तब्दील होने के चलते आगामी पांच वर्षों में इस उद्योग में उल्लेखनीय परिवर्तन होने तय हैं। सुरक्षित तथा सुविधाजनक भोजन की लोकप्रियता को देखते हुए भारतीय खाद्य उद्योग में खुले खाद्य पदार्थों के बजाय पैकेज्ड और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों तथा पेय उत्पादों को प्राथमिकता मिलेगी। भारत में ई-कॉमर्स के 2017 से 27% की सीएजीआर से बढ़ते हुए 2026 तक 200 बिलियन यूएस डॉलर का होने का अनुमान है। ऐसे में ट्रांजिट पैकेजिंग और ओमनी-चैनल पैकेजिंग सबसे अधिक संभावनाओं वाले खंड के रूप में उभर रहे हैं, जहां भारतीय पैकेजिंग उद्योग को विस्तार मिलने की उल्लेखनीय संभावनाएं हैं।  

इस शोध अध्ययन के निष्कर्ष ‘पैकेजिंग उद्योग - संभावनाएं और आगे की राह’ विषय पर 4 सितंबर, 2020 को आयोजित वेबिनार के दौरान साझा किए गए। इस वेबिनार में भारतीय पैकेजिंग उद्योग के विकास के लिए संभावित क्षेत्रों और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए प्रमुख रणनीतियों का भी उल्लेख किया गया।   

‘पैकेजिंग उद्योग - संभावनाएं और आगे की राह’ शीर्षक वाले इस शोध अध्ययन में अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस क्षेत्र की स्पर्धात्मकता के प्रमुख पहलुओं का विश्लेषण किया गया है। साथ ही भारत में इस क्षेत्र में मुख्य रूप से खाद्य पैकेजिंग क्षेत्र के लिए प्रमुख चुनौतियों को चिह्नित किया गया है। साथ ही इनसे निपटने के लिए रणनीतियां भी सुझाई गई हैं। अध्ययन में भारतीय पैकेजिंग क्षेत्र में विनिर्माण पैकेजिंग और पैकेजिंग सेवाओं को दो सबसे अधिक संभावनाओं वाले खंडों के रूप में चिह्नित किया गया है और समुचित नीतिगत उपाय करते हुए सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) में पारंपरिक पैकेजिंग विनिर्माण इकाइयां विकसित करने की संस्तुति की गई है। साथ ही ऐसे केंद्रों पर पैकेजिंग पार्क स्थापित करने के लिए सार्वजनिक निजी भागीदारी की वकालत की गई है, जहां विनिर्माण क्लस्टर सक्रिय हैं। इससे एमएसएमई की उत्पादकता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।    

अध्ययन में इस क्षेत्र के विकास में अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी) की भूमिका का भी विशेष रूप से उल्लेख किया गया है और अनुसंधान एवं विकास में निवेश बढ़ाने की जरूरत बताई गई है।  

क्षमता निर्माण की दृष्टि से अध्ययन में पैकेजिंग के क्षेत्र में बेहतर शिक्षण-प्रशिक्षण के लिए संस्थानों की संख्या बढ़ाने, भारतीय पैकेजिंग संस्थान में समुचित निवेश लाकर उसे मजबूत बनाने और केंद्र सरकार के कौशल विकास कार्यक्रम में भी भारतीय पैकेजिंग शिक्षा को शामिल करने जैसे उपाय सुझाए गए हैं।  

अध्ययन का विमोचन वेबिनार के मुख्य अतिथि और आईआईपी के चेयरमैन श्री सुबोध गुप्ता तथा आईआईपी के निदेशक श्री तनवीर आलम द्वारा किया गया। श्री सुबोध गुप्ता ने इस अवसर पर इस बात पर प्रकाश डाला कि पैकेजिंग किसी भी उत्पाद के विकास और कोविड-19 महामारी जैसे हालात में उत्पाद की सुरक्षा में महत्त्वपूर्ण होती है। आईआईपी के निदेशक श्री तनवीर आलम ने भारतीय पैकेजिंग उद्योग के विकास के वाहक के रूप में और विशेष रूप से जोखिमपूर्ण वस्तुओं की निर्यात पैकेजिंग जैसे क्षेत्रों में आईआईपी की भूमिका का उल्लेख किया। 

एक्ज़िम बैंक के प्रबंध निदेशक श्री डेविड रस्कीना ने अपने स्वागत संबोधन में कहा कि पैकेजिंग उद्योग का विशेष महत्त्व है और वस्तुओं के अंतरराष्ट्रीय व्यापार में इसकी महत्त्वपूर्ण भूमिका है। श्री रस्कीना ने कहा, “आत्मनिर्भर भारत” और “वोकल फॉर लोकल” जैसे अभियानों के केंद्र में अंतरराष्ट्रीय व्यापार है, इसलिए घरेलू उद्योग को अपने इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए उत्पाद विकास के प्रत्येक स्तर पर एकजुट प्रयास करने की जरूरत है। 

 

अधिक जानकारी के लिए कृपया संपर्क कीजिएः 

श्री एस. प्रहलादन, मुख्य महाप्रबंधक, शोध एवं विश्लेषण समूह  

भारतीय निर्यात-आयात बैंक, केंद्र एक भवन, 21वीं मंज़िल, विश्व व्यापार केंद्र संकुल, मुंबई – 400005  

फोन: 91-22-2217 2704, फैक्स: 91-22-2218 0743, ई-मेल: prahalathan@eximbankindia.in