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भारत की सृजनात्मक अर्थव्यवस्था में छिपी हैं निर्यातों की असीम संभावनाएं - इंडिया एक्ज़िम बैंक

इंडिया एक्ज़िम बैंक ने भारत की सृजनात्मक अर्थव्यवस्था पर एक शोध पत्र प्रकाशित किया है। इसमें भारत की सृजनात्मक अर्थव्यवस्था में मौजूद अप्रयुक्त निर्यात क्षमता का विश्लेषण किया गया है। ‘भारत की सृजनात्मक अर्थव्यवस्थाः चिंतन एवं विकास’ शीर्षक वाले इस शोध पत्र में संयुक्त राष्‍ट्र द्वारा किए गए वर्गीकरण के अनुसार, अन्य के साथ-साथ, कला एवं शिल्प, ऑडियो-विज़ुअल, प्रकाशन तथा विज़ुअल आर्ट्स जैसे 7 विभिन्‍न सृजनात्मक क्षेत्रों का विश्लेषण किया गया है। यह अपनी तरह का पहला शोध पत्र है।

इंडिया एक्ज़िम बैंक के इस शोध के अनुसार, 2019 में भारत से सृजनात्मक वस्तुओं और सेवाओं का निर्यात लगभग 121 बिलियन यूएस डॉलर का रहा था। इसमें से सृजनात्मक सेवाओं का निर्यात लगभग 100 बिलियन यूएस डॉलर का था।

भारत में, 2019 में सृजनात्मक वस्तुओं के कुल निर्यातों का 87.5% हिस्सा डिज़ाइन क्षेत्र का रहा। बाकी के 9% में कला और शिल्प क्षेत्र का योगदान रहा। विस्तृत विश्लेषण से पता चलता है कि भारतीय संदर्भ में, सृजनात्मक वस्तु उद्योग में 16 बिलियन यूएस डॉलर का व्यापार सरप्लस है।

सृजनात्मक अर्थव्यवस्था पर आधारित इस शोध पत्र का विमोचन माननीय सांसद, राज्यसभा, पद्म विभूषण डॉ. सोनल मानसिंह द्वारा 03 सितंबर, 2022 को राष्‍ट्रीय शिल्प संग्रहालय एवं हस्तकला अकादमी, नई दिल्ली में आयोजित एक्ज़िम बाज़ार में किया गया।

भारत में सृजनात्मक अर्थव्यवस्था काफी विविध है। फिल्म जैसे रचनात्मक उद्योगों का इसमें बहुत बड़ा योगदान है। यूएस को छोड़ दिया जाए तो राजस्व के आधार पर शीर्ष अंतरराष्‍ट्रीय बॉक्स ऑफिस बाजारों में भारत छठे स्थान पर आता है।

इस शोध अध्ययन में, सृजनात्मकता के उभरते क्षेत्र में अन्य के साथ-साथ, मानव रचनात्मकता, ज्ञान और बौद्धिक संपदा जैसे क्षेत्र में तकनीक की महत्त्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित किया गया है। साथ ही, सृजनात्मक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाले कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग, संवर्धित वास्तविकता तथा ब्लॉकचेन की भूमिका का भी विश्लेषण किया गया है।  

इंडिया एक्ज़िम बैंक के इस अनूठे शोध अध्ययन में भारत में सृजनात्मक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए विभिन्‍न अनुशंसाएं की गई हैं। इनमें अन्य के साथ-साथ, भारत में सृजनात्मक उद्योगों को परिभाषित और मैप करना, सृजनात्मक उद्योगों के वित्तपोषण के लिए फंड बनाना, संयुक्त कार्यक्रमों पर फोकस करना, कॉपीराइट से जुड़े मसलों का समाधान करना, एमएसएमई और क्षेत्रीय दस्तकारों को बढ़ावा देना, सृजनात्मक जिलों और केंद्रों की स्थापना करना और सृजनात्मक उद्योगों के लिए एक विशेष संस्था बनाने जैसे सुझाव शामिल हैं।

इस शोध अध्ययन में, यूके, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, दक्षिण कोरिया, इंडोनेशिया और थाइलैंड जैसे देशों में सृजनात्मक अर्थव्यवस्था की नीतियों का भी विश्लेषण किया गया है, जहां सृजनात्मक अर्थव्यवस्था अहम भूमिका अदा कर रही है और इसके लिए अलग से मंत्रालय या संस्थान बनाए गए हैं।

हालांकि भारत ने सृजनात्मक अर्थव्यवस्था से जुड़े उद्योगों में प्रगति की है, तथापि देश में सृजनात्मक अर्थव्यवस्था का योगदान बढ़ाने की अभी काफी संभावनाएं हैं। इंडिया एक्ज़िम बैंक ने अपने इस शोध अध्ययन में, देश में सृजनात्मक अर्थव्यवस्था के लिए कोई एक परिभाषा निरूपित करने और इसके लिए एक अलग संस्थान बनाने की संस्तुति की है, जो इसकी अप्रयुक्त क्षमता का दोहन कर सके।

विस्तृत जानकारी के लिए कृपया संपर्क कीजिएः 
श्री एस. प्रहलादन,
मुख्य महाप्रबंधक, शोध एवं विश्लेषण समूह
भारतीय निर्यात-आयात बैंक, 
ईमेलः prahalathan@eximbankindia.in