चुनिंदा विनिर्माण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता हो तो कम हो सकते हैं 186 बिलियन यूएस डॉलर से अधिक के आयातः एक्ज़िम बैंक शोध अध्ययन
भारतीय निर्यात-आयात बैंक (इंडिया एक्ज़िम बैंक) द्वारा प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, भारत में विनिर्माण क्षेत्र में हाल में कुछ मंदी देखी गई। भारत के जीवीए में विनिर्माण क्षेत्र के योगदान में गिरावट आई है। वर्ष 2010-11 में यह 18.4 प्रतिशत था, जो वर्ष 2019-20 में 15.1 प्रतिशत रह गया। देश में निजी खपत की मांग बढ़ने के बावजूद यह गिरावट दर्ज की गई। घरेलू विनिर्माण क्षेत्र में इस कमजोरी के कारण बढ़ती घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पिछले कुछ वर्षों में आयात पर निर्भरता और अधिक बढ़ गई।
‘आत्मनिर्भर भारतः दृष्टिकोण और रणनीतिक क्षेत्र’ शीर्षक वाले इस शोध अध्ययन में आयातों को कम करने के लिए कुछ चुनिंदा क्षेत्रों को चिह्नित किया गया है और इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उपकरण, रसायन एवं संबद्ध क्षेत्र, दवाएं और चुनिंदा कृषि उत्पाद जैसे घरेलू विनिर्माण क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ाने पर फोकस किया गया है। अध्ययन में ऑटो पुर्जे, लौह और इस्पात जैसे क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है, जहां भारत के लिए कुल व्यापार अधिशेष है, तथापि कुछ उप-श्रेणियों में, विशेष रूप से चीन के साथ व्यापार घाटा है। इसके अलावा, अध्ययन में आयात के विकल्पों के रूप में दुर्लभ मृदा तत्त्वों जैसे क्षेत्र को भी शामिल किया गया है, क्योंकि हाई-टेक विनिर्माण में प्रवेश करने के लिए इन रणनीतिक खनिजों को संरक्षित करना भारत के लिए महत्त्वपूर्ण है। भारत द्वारा इन क्षेत्रों से 186 बिलियन यूएस डॉलर से अधिक का आयात किया जाता है, जिसमें भारत द्वारा कुल आयातों के लगभग 39 प्रतिशत और गैर-तेल आयातों में 50 प्रतिशत की हिस्सेदारी इसी क्षेत्र की है।
अध्ययन में उत्पादन और निर्यात क्षमताओं के मामले में इन क्षेत्रों के प्रदर्शन का विश्लेषण किया गया है और इन क्षेत्रों में आयात निर्भरता पर प्रकाश डाला गया है। प्रत्येक क्षेत्र की विशिष्ट आवश्यकताओं और उनके सामने आने वाली चुनौतियों के विश्लेषण के आधार पर, अध्ययन में घरेलू उत्पादन को बढ़ाकर आयात निर्भरता कम करने के लिए विभिन्न सेक्टर-विशिष्ट रणनीतियों की सिफारिश की गई है। उदाहरण के लिए, जहां कृषि और दुर्लभ मृदा तत्त्वों जैसे क्षेत्रों में, रणनीति बनाने की बहुत ज्यादा आवश्यकता बताई गई है, ताकि सहयोगपूर्ण व्यवस्था बनाई जा सके और घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अन्य भागीदार देशों में जावक निवेश को प्रोत्साहित किया जा सक। वहीं गहन प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में ऐसी रणनीतियां बनाने पर फोकस किया गया है, जिससे आयात निर्भरता को कम करने के लिए स्वदेशीकरण को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया जा सके। अध्ययन में सुझाई गई कुछ अन्य रणनीतियों में अन्य के साथ-साथ निम्नलिखित शामिल हैं: नवाचार आधारित विनिर्माण को प्रोत्साहित करने के विशिष्ट उपाय करना, कर और शुल्क की ढांचागत खामियों को को दूर करना, संयुक्त उद्यमों को प्रोत्साहित करना, और सरकारी विनियमों एवं कार्यक्रमों का पुनर्मूल्यांकन करना । अध्ययन में कुछ बहुआयामी रणनीतियों पर भी प्रकाश डाला गया है जो पूरे विनिर्माण क्षेत्र में स्वदेशीकरण को प्रोत्साहित कर सकती हैं। यह अध्ययन 16 अगस्त, 2020 को इंडिया एक्ज़िम बैंक द्वारा ‘आत्मनिर्भर भारत के लिए रणनीतियां’ विषय पर आयोजित एक चर्चापरक वेबिनार के दौरान जारी किया गया।
अध्ययन का विमोचन वेबिनार के मुख्य अतिथि श्री के. राजारमन द्वारा किया गया, जो वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग में अपर सचिव हैं। इस अवसर पर, श्री राजारमन ने भारत सरकार द्वारा आयात निर्भरता को कम करने और आत्मनिर्भरता के लिए किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला, ताकि महामारी के कारण आई मंदी से जल्द से जल्द उबरा जा सके और अर्थव्यवस्था में सुधार का मार्ग प्रशस्त हो सके।
इंडिया एक्ज़िम बैंक के प्रबंध निदेशक श्री डेविड रस्कीना ने अपने स्वागत वक्तव्य में कहा कि निर्माण क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को बढ़ाना "आत्मानिर्भर भारत" की संकल्पना का केंद्र बिंदु होगा। श्री रस्कीना ने कहा कि वर्तमान समय में भारत के आर्थिक विकास, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक मूल्य श्रृंखला में जबरदस्त भागीदारी के कारण भारत की क्षमता पर विदेशों का ध्यान केंद्रित है, अतः घरेलू क्षमताओं को बढ़ाने के लिए संरचनात्मक सुधारों पर तेजी से प्रगति के लिए यह समय उचित होगा।
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श्री एस. प्रहलादन, मुख्य महाप्रबंधक, शोध एवं विश्लेषण समूह
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