self

बेहतर निगरानी और नीतिगत बाधाओं को दूर करने की जरूरतः एक्ज़िम बैंक शोध अध्ययन

भारतीय निर्यात-आयात बैंक (इंडिया एक्ज़िम बैक) के एक शोध अध्ययन के अनुसार, भारत सरकार निर्यातों के संवर्द्धन और बेहतर परिचालन परिवेश बनाने के लिए नीतियां बना रही है। किन्तु इसके साथ-साथ उन बाधाओं को दूर करने पर फोकस करने की भी जरूरत है, जिनके चलते इन नीतियों का सफल क्रियान्वयन नहीं हो पाता है। ‘चुनिंदा क्षेत्रों में निर्यातों के लिए घरेलू बाधाएं’ विषयक इस शोध अध्ययन में चुनिंदा क्षेत्रों में भारतीय निर्यातकों के सामने आने वाली घरेलू नीतिगत बाधाओं का विश्लेषण किया गया है। इनमें टेक्सटाइल्स व अपैरल, रत्न एवं आभूषण, ऑटोमोबाइल और ऑटो-पुर्जे, इलेक्ट्रॉनिक्स (मोबाइल फोनों पर फोकस) और फार्मासूटिकल्स जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इन क्षेत्रों में चुनौतियों के विश्लेषण के आधार पर अध्ययन में कुछ नीतिगत उपाय चिह्नित किए गए हैं, जिनसे इन क्षेत्रों में निर्यातकों की परिचालन स्थिति और क्षमता में सुधार आ सकता है। इस अध्ययन में देश में विभिन्न उत्पादों के लिए वैश्विक निर्यात केंद्र बनाने हेतु नीतियां भी चिह्नित की गई हैं।  

अध्ययन में उन विषयों का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है, जिनसे विभिन्न क्षेत्रों में निर्यातकों को गुजरना पड़ता है। इनमें अन्य के साथ-साथ बंदरगाहों पर लागत कम करने के लिए सरकार का सीधा हस्तक्षेप करने; विशेष रूप से, ‘भारत से वस्तु निर्यात योजना’ (एमईआईएस) के खत्म होने के बाद कोई उत्पादन उन्मुख आकर्षक प्रोत्साहन योजना लाने; सरकार द्वारा मंजूरियों और रिफंड तथा कस्टम मंजूरी में लगने वाले समय को कम करने तथा विनिर्माण उद्योग में सुधार के लिए जीएसटी रिफंड और ड्यूटी ड्रॉबैक रिफंड में तेजी लाने की जरूरत जैसे उपाय शामिल हैं। अध्ययन में इस निष्कर्ष पर पहुंचा गया है कि यदि जीएसटी रिफंड त्वरित आधार पर हो तो जीडीपी 2 प्रतिशत, निर्यात 7 प्रतिशत, कुल आयात 6 प्रतिशत और रोजगार करीब 4 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं। कुछ क्षेत्रों में जीएसटी के त्वरित रिफंड का प्रभाव काफी अधिक होगा और छह चिह्नित क्षेत्रों से निर्यातों में दोहरे अंकों में वृद्धि दर्ज की जा सकती है। 

अध्ययन में इन चिह्नित क्षेत्रों पर फोकस करने के लिए कुछ विशिष्ट प्राथमिक क्षेत्र भी चिह्नित किए गए हैं। ये ऐसे क्षेत्र हैं, जिनमें काम किया जाए तो निर्यातकों की परिचालनगत क्षमता में तेजी से सुधार आ सकता है। अध्ययन में विनिर्माण और निर्यातों में नीतिगत सुधारों के मध्यम और दीर्घावधि उपाय भी सुझाए गए हैं।  

इस अध्ययन का विमोचन ‘निर्यातों में नीतिगत बाधाओं को दूर करने की रणनीतियां’ विषय पर 3 अक्टूबर, 2020 को आयोजित चर्चापरक वेबिनार के दौरान भारत के माननीय वाणिज्य एवं उद्योग तथा रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल द्वारा किया गया। इस अवसर पर श्री पीयूष गोयल ने निर्यातों को बढ़ावा देने, घरेलू विनिर्माण को बढ़ाने और भारतीय निर्यातकों की स्पर्द्धात्मकता बढ़ाने के लिए भारत सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया। 

इंडिया एक्ज़िम बैंक के प्रबंध निदेशक श्री डेविड रस्कीना ने अपने स्वागत संबोधन में कहा कि वर्तमान में महामारी के चलते अंतरराष्ट्रीय व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। किन्तु इससे भारत जैसे देशों को वैश्विक वैल्यू चेन (जीवीसी) एकीकरण बढ़ाने का भी अवसर मिला है। क्योंकि अधिकतर देश लचीली सप्लाई चेन बनाने के लिए वैकल्पिक आपूर्तिकर्ता जोड़ना चाहते हैं। श्री रस्कीना ने कहा कि इंडिया एक्ज़िम बैंक द्वारा किए गए अध्ययन में सुझाई गई रणनीतियों से जीवीसी एकीकरण के लिए विदेशी निवेश को बढ़ावा देने और प्रतिस्पर्द्धी  तथा लचीला निर्यात क्षेत्र बनाने में मदद मिलेगी।  

 

अधिक जानकारी के लिए कृपया संपर्क कीजिएः 

श्री एस. प्रहलादन, मुख्य महाप्रबंधक, शोध एवं विश्लेषण समूह 

भारतीय निर्यात-आयात बैंक, 21वीं मंज़िल, विश्व व्यापार केंद्र संकुल, कफ़ परेड, मुंबई – 40005

फोन: 91-22-2217 2704, ई-मेल: prahalathan@eximbankindia.in