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भारत और अफ्रीकी देशों के बीच हैं व्यवसाय अवसरों की अपार संभावनाएं : इंडिया एक्ज़िम बैंक

परियोजना भागीदारी पर 17वें सीआईआई-एक्ज़िम बैंक कॉन्क्लेव में 19 जुलाई, 2022 को “सुदृढ़ अफ्रीका का निर्माणः भारत का बढ़ता सहयोग” विषय पर इंडिया एक्ज़िम बैंक के शोध प्रकाशन का विमोचन किया गया। इस दौरान भारत के माननीय वाणिज्य और उद्योग, उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण और कपड़ा मंत्री श्री पीयूष गोयल, मॉरीशस के माननीय उप राष्‍ट्रपति श्री मैरी साइरिल एडी बोइसीज़ॉन, जीओएसके, गाम्बिया के माननीय उप राष्‍ट्रपति श्री बदारा ए. जोफ़, दक्षिण सूडान के माननीय उप राष्‍ट्रपति डॉ. जेम्स वानी इग्गा, ज़ाम्बिया की माननीय उप राष्‍ट्रपति सुश्री डब्ल्यू. के. मुटाले नलुमैंगो, नामीबिया की माननीय उप प्रधानमंत्री और अंतरराष्‍ट्रीय संबंध एवं सहयोग मंत्री सुश्री नेतुम्बो नांदी न्दाइत्वा और कॉर्पोरेट जगत के वरिष्‍ठ अधिकारियों सहित इंडिया एक्ज़िम बैंक की प्रबंध निदेशक सुश्री हर्षा बंगारी उपस्थित रहीं। 

इंडिया एक्ज़िम बैंक के इस शोध प्रकाशन में भारत और अफ्रीका के बीच मौजूद परस्पर व्यापार की अपार संभावनाओं का उल्लेख किया गया है। 2021 में भारत-अफ्रीका का कुल व्यापार 82.5 बिलियन यूएस डॉलर का रहा। दोनों क्षेत्रों के बीच व्यापार का यह अब तक का सर्वोच्च स्तर रहा है। आईटीसी की निर्यात संभावना पद्धति रा उपयोग कर इस शोध में बताया गया है कि भारत और अफ्रीका के बीच 48 बिलियन यूएस डॉलर के द्विपक्षीय निर्यात की संभावनाएं हैं। इंडिया एक्ज़िम बैंक के इस शोध प्रकाशन में अफ्रीका के साथ भारत के द्विपक्षीय व्यापार और निवेश की वर्तमान स्थिति और आने वाले समय में दोनों क्षेत्रों से निर्यातों की संभावनाओं का अध्ययन किया गया है। साथ ही, पिछले कुछ वर्षों में अफ्रीका के विकास में भारत के बढ़े सहयोग को भी रेखांकित किया गया है। इसके अलावा, विशेष रूप से हाल में बदलते वैश्‍विक परिवेश को ध्यान में रखते हुए भारत द्वारा इस विकास भागीदारी को और बढ़ाने की ज़रूरत का भी उल्लेख किया गया है। अफ्रीका में भारत के परियोजना निर्यातों के मौजूदा भौगोलिक और क्षेत्रवार विस्तार को समझने के लिए, एएफडीबी और विश्‍व बैंक जैसे बहुपक्षीय विकास बैंकों द्वारा वित्तपोषित परियोजनाओं में भारतीय कॉन्ट्रैक्टरों को मिलने वाले कॉन्ट्रैक्टों का भी विश्लेषण किया गया है। इसके अलावा, इसमें महामारी के बाद सुदृढ़ अफ्रीका के निर्माण में भारत का सहयोग बढ़ाने तथा अन्य के साथ-साथ अफ्रीका के कृषि, स्वास्थ्य, स्वच्छ व हरित प्रौद्योगिकी जैसे बेहतर संभावना वाले क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाकर निर्यात बढ़ाने वाली रणनीतियां भी सुझाई गई हैं, ताकि यह पुनः उच्च वृद्धि वाले क्षेत्रों में शामिल हो सके। इस शोध अध्ययन में बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए वैकल्पिक व्यवस्था अपनाने और व्यापार वित्त की उपलब्धता बढ़ाने का सुझाव भी दिया गया है।    

कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र के दौरान भारत के माननीय वाणिज्य और उद्योग, उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण और कपड़ा मंत्री श्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत अफ्रीका को ‘प्रगति का साथी’ मानता है। उन्होंने कहा कि भारत-अफ्रीका भागीदारी के चार आधार स्तंभ हैं- दोनों देशों के लोग, व्यवसाय, व्यापार और सरकार। उन्होंने भविष्य में भारत-अफ्रीका भागीदारी की महती भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि इस भागीदारी से विकासशील विश्‍व को खाद्य असुरक्षा के गर्त से निकाल कर समृद्धि की ओर ले जाने में मदद मिलेगी।

इंडिया एक्ज़िम बैंक की प्रबंध निदेशक सुश्री हर्षा बंगारी ने कहा कि व्यापार वित्त की उपलब्धता बढ़ाकर भारत और अफ्रीका की अब तक अप्रयुक्त निर्यात क्षमता का उपयोग किया जा सकता है और वैश्‍विक निर्यात भागीदारी में दोनों क्षेत्रों की हिस्सेदारी को बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने व्यापार वित्त के अंतर को कम करने के उपाय प्रदान करने में बहुपक्षीय विकास बैंकों और विकास वित्त संस्थाओं की बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित किया। सुश्री हर्षा बंगारी ने अफ्रीकी महाद्वीपीय मुक्त व्यापार क्षेत्र करार में भारत के लिए मौजूद अपार अवसरों पर ज़ोर देते हुए कहा कि इन अवसरों के भुनाने के लिए जरूरी है कि भारत, इस महाद्वीप की बदलती आवश्यकताओं को पूरा करने और अफ्रीका को दिए जाने वाले सहयोग में डायनैमिक रहे। 

विस्तृत जानकारी के लिए कृपया संपर्क कीजिएः 

श्री डेविड सिनाटे,
मुख्य महाप्रबंधक, भारतीय निर्यात-आयात बैंक,
केन्द्र एक भवन, 21वीं मंज़िल, विश्‍व व्यापार केन्द्र संकुल, कफ़ परेड, 
मुंबई 400005
फोन +91-22-22182511; 
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