इंडिया एक्ज़िम बैंक ने काला घोड़ा कला महोत्सव के लिए दिया सहयोग
आइए और बनिए कला, शिल्प और सर्जनात्मकता के सबसे बड़े उत्सव का हिस्सा, 4 से 12 फरवरी, 2023
लौटा एशिया का सबसे बड़ा सांस्कृतिक उत्सव और भारत का सबसे बड़ा बहु-सांस्कृतिक महोत्सव एक्ज़िम बैंक ने 60 से ज्यादा दस्तकारों को अपनी कला के प्रदर्शन के लिए दिया सहयोग
मुंबई, 2 फरवरी, 2023: इंडिया एक्ज़िम बैंक ने इस साल 4 से 12 फरवरी तक होने वाले मुंबई के प्रतिष्ठित वार्षिक काला घोड़ा कला महोत्सव में सहयोग दिया है। इस महोत्सव में 60 से ज्यादा दस्तकार अपनी अनूठी पारंपरिक कलाओं का प्रदर्शन करेंगे, जो इंडिया एक्ज़िम बैंक से एक दशक से अधिक समय से जुड़े हुए हैं। बैंक ने इन्हें क्षमता विकास, प्रोडक्ट प्लेसमेंट और मार्केटिंग सलाहकारी सेवाओं के जरिए सहायता दी है। इस महोत्सव की थीम- ‘कल की ओर बढ़ता कल’ भी उतनी ही अनूठी है, जितना यह महोत्सव। इस दौरान, 15 से अधिक प्रतिष्ठित जगहों पर 14 क्षेत्रों में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन होगा। इनमें नृत्य, संगीत, विज़ुअल आर्ट्स, रंगमंच, साहित्य, खाना-खज़ाना, बाल साहित्य और कार्यशालाएं, सिनेमा, हेरिटेज वॉक, स्टैंड अप कॉमेडी, स्ट्रीट आर्ट, शहरी डिज़ाइन और वास्तुकला जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
इस कार्यक्रम के बारे में काला घोड़ा असोसिएशन की माननीय चेयरपर्सन वृंदा मिलर ने कहा कि “काला घोड़ा कला महोत्सव इसका उत्कृष्ट उदाहरण है कि सामुदायिक सहयोग के जरिए क्या कुछ हासिल किया जा सकता है। यह असल मायने में लोगों का लोगों द्वारा महोत्सव है। हम बहुत उत्साहित हैं कि शहर का यह प्यारा महोत्सव दो साल बाद फिर से लौट रहा है। इस बीच बहुत कुछ बदल गया है और हमारी थीम ‘कल की ओर बढ़ता कल’ आने वाले कल के लिए महोत्सव को डिज़ाइन करते हुए 22 साल की हमारी विरासत की गाथा बयां करती है। यह एक निष्क्रिय काल से धीरे-धीरे उभरते सकारात्मकता, परिवर्तन और प्रगति के दौर का संकेत है। हर साल देशभर से सैकड़ों व्यक्ति और उद्यम इस उत्सव के लिए साथ आते हैं। इस वर्ष भी वही उत्साह दिखाई देता है। इंडिया एक्ज़िम बैंक का पार्टनर के रूप में हमसे जुड़ना हमारे लिए हर्ष का विषय है, क्योंकि हमारे मकसद एक हैं- भारतीय कला और शिल्प को बढ़ावा देना। इस सहयोग के जरिए हम मिलकर ग्रामीण दस्तकारों और ग्रासरूट उद्यमों को निश्चित रूप से बढ़ावा देने में कामयाब हो सकेंगे।”
काला घोड़ा कला महोत्सव के साथ सहयोग का उल्लेख करते हुए इंडिया एक्ज़िम बैंक की प्रबंध निदेशक सुश्री हर्षा बंगारी ने कहा, “सर्जनात्मक उद्योग से 2021 में भारत के निर्यात 143 बिलियन यूएस डॉलर के रहे। सर्जनात्मक अर्थव्यवस्था रोजगार के अवसर सृजित करती है और इससे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को सहायता मिलती है। भारतीय पारंपरिक कला और शिल्प को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता को पूरा करने और इन्हें वैश्विक मंच प्रदान करने में काला घोड़ा कला महोत्सव से जुड़ना हमारे लिए गौरव की बात है। हम मिलकर ग्रामीण दस्तकारों की पहुंच सीधे बाजार तक बना सकेंगे। साथ ही, इससे उन दस्तकारों को उपभोक्ताओं की प्राथमिकताओं को समझने, उद्योग के प्रति समझ बढ़ाने और नवीनतम ट्रेंड खोजने में मदद मिलेगी।”
आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, महाराष्ट्र, दिल्ली, कर्नाटक, कश्मीर, तमिलनाडु, गुजरात और मध्य प्रदेश के दस्तकार इस प्रदर्शनी में हिस्सा लेंगे। इसमें हिस्सा लेने वाले कुछ दस्तकार और बुनकर राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पुरस्कार प्राप्त हैं, जिनका कौशल, प्रतिभा और तकनीक उनके उत्पादों में परिलक्षित होते हैं।
इस प्रदर्शनी में अन्य के साथ-साथ मधुबनी पेंटिंग, चमड़े की कठपुतली, वारली पेंटिंग, पिछवाई पेंटिंग, फुलकारी कढ़ाई, पट्टचित्र पेंटिंग, फड़ पेंटिंग, बनारसी सिल्क साड़ियां, लाख की चूड़ियां, कावड़ पेंटिंग, कलमकारी पेंटिंग, चंदेरी बुनाई, सरैमिक पॉटरी, बीदरी कलाकृतियां बिक्री के लिए उपलब्ध होंगी।
इंडिया एक्ज़िम बैंक अपने ग्रासरूट उद्यम विकास कार्यक्रम और मार्केटिंग सलाहकारी सेवाओं के जरिए मास्टर शिल्पकारों, बुनकरों, क्लस्टरों, स्वयं-सहायता समूहों, गैर-सरकारी संगठनों, ग्रासरूट और सूक्ष्म उद्यमों को क्षमता विकास, भारत और विदेशों में व्यापार मेलों और प्रदर्शनियों में प्रतिभागिता करने और उनके लिए विदेश में खरीदार तथा वितरक तलाशने में सहायता प्रदान करता है। इन कार्यक्रमों के अंतर्गत दी गई सहायता से वित्तीय सशक्तीकरण, रोजगार सृजन, उद्यमिता बढ़ाने और देश के सदियों पुराने पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों के पुनरुत्थान और भारतीय शिल्प विरासत को आगे बढ़ाने में मदद मिली है।
काला घोड़ा कला महोत्सव, 1998 में बने काला घोड़ा असोसिएशन द्वारा आयोजित किया जाता है। इसका उद्देश्य दक्षिण मुंबई के कला जिले काला घोड़ा क्षेत्र की विरासत को सहेजना है। काला घोड़ा क्षेत्र अपने हेरिटेज भवनों, कला और सांस्कृतिक स्थलों के लिए मशहूर है, जहां संग्रहालय, कला दीर्घा, बुटीक, रेस्त्रां और प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थाएं हैं। यह क्षेत्र खाने के पारखी, फैशन डिजाइनर, वास्तुकला विशेषज्ञ और रचनात्मक प्रतिभाओं को आकर्षित करता है। कला, शिल्प और सांस्कृतिक हेरिटेज को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस महोत्सव से जुटाए जाने वाले फंड को इस असोसिएशन द्वारा इस क्षेत्र के पुनरुद्धार में लगाया जाता है।
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सुश्री दीपाली अग्रवाल
मुख्य महाप्रबंधक – कॉर्पोरेट संचार समूह, भारतीय निर्यात-आयात बैंक
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