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बेहतर सहयोग और नए क्षेत्रों को चिह्नित कर और मजबूत किए जा सकते हैं भारत-जीसीसी संबंधः इंडिया एक्ज़िम बैंक

इंडिया एक्ज़िम बैंक ने 06 अक्टूबर, 2020 को बैंक द्वारा आयोजित “भारत-जीसीसी संबंधों को बढ़ानाः परियोजना निर्यात और अन्य संभावनाएं” विषयक वेबिनार के दौरान “जीसीसी के साथ भारत के द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ानाः व्यापार, प्रवासन और रेमिटैंस में रुझान” विषयक अपने शोध अध्ययन का विमोचन किया। इस कार्यक्रम के दौरान ओमान में भारत के माननीय राजदूत श्री मुनु महावर, कतर में भारत के माननीय राजदूत श्री दीपक मित्तल, बहरीन में भारत के माननीय राजदूत श्री पीयूष श्रीवास्तव और कुवैत में भारतीय दूतावास, लार्सेन एंड टूब्रो लिमिटेड तथा एफ्कॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। 

पिछले एक दशक के दौरन खाड़ी क्षेत्र से भारत के व्यापार संबंधों में हालांकि उल्लेखनीय परिवर्तन आया है, किन्तु इसकी संरचना और पैटर्न का विविधीकरण अभी किया जाना शेष है और विशेष रूप से परियोजना निर्यातों में भारत के निर्यातों के विविधीकरण की अपार संभावनाएं हैं।  

इस अध्ययन में भारत-खाड़ी क्षेत्र के आर्थिक संबंधों में सहयोग के दो अलग क्षेत्रों का विश्लेषण किया गया है। इनमें द्विपक्षीय व्यापार, विशेष रूप से कमोडिटी व्यापार और भारत से प्रवासन जैसे क्षेत्र शामिल हैं, जिससे खाड़ी क्षेत्र में बड़ा प्रवासी समुदाय बन रहा है। अध्ययन में उल्लेख किया गया है कि जीसीसी भारत के सबसे बड़े क्षेत्रीय व्यापार भागीदारों में से एक है, जिनका कुल व्यापार 2009-2019 की अवधि के दौरान औसतन 120 बिलियन यूएस डॉलर से अधिक का रहा। अध्ययन में बताया गया है कि जीसीसी के लिए भारत दूसरा सबसे बड़ा आयातक और तीसरा सबसे बड़ा आयात स्रोत बना रहा। जीसीसी के कुल निर्यातों और आयातों में भारत का हिस्सा लगभग 10 प्रतिशत रहा। 

इन बढ़ते आर्थिक संबंधों में इस क्षेत्र में बढ़ते भारतीय प्रवासी समुदाय की बड़ी भूमिका है। जीसीसी देशों में 90 लाख से अधिक प्रवासी भारतीय रहते हैं, जिनसे भारत को 2018 में 48.5 बिलियन यूएस डॉलर का बड़ा रेमिटैंस आया। अध्ययन में कहा गया है कि भारत-खाड़ी क्षेत्र के संबंधों के इस परस्पर सहयोग से भारत-खाड़ी संबंधों को नया विस्तार मिलने की राह आसान हो गई है। 

अध्ययन में इस निष्कर्ष पर पहुंचा गया है कि पारस्परिक हितों पर आधारित सहयोग में अन्य के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र, फार्मासूटिकल क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी), पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्सों का निर्माण और विकास, बुनियादी ढांचागत विकास, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण, शिक्षा तथा कौशल विकास जैसे क्षेत्र शामिल किए जा सकते हैं। 

इंडिया एक्ज़िम बैंक के इस अध्ययन में द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ाने वाली कुछ नीतियां भी सुझाई गई हैं। इनमें अन्य के साथ-साथ (i) भारत के लिए निर्यातों की संभावना वाली चिह्नित वस्तुओं का व्यापार बढ़ाना, ताकि खाड़ी क्षेत्र के साथ भारत के उच्च व्यापार घाटे को कम करने में मदद मिले; (ii) भारत से परियोजना निर्यातों पर अधिक फोकस करना; (iii) बाजारों का विविधीकरण; (iv) सेवा क्षेत्र में अधिक सहयोग; और (v) व्यापार लॉजिस्टिक्स में सुधार लाने जैसी नीतियां शामिल हैं। 

इंडिया एक्ज़िम बैंक के प्रबंध निदेशक श्री डेविड रस्कीना ने अपने संबोधन में इस बात का उल्लेख किया कि खाड़ी क्षेत्र के देश, विशेष रूप से जीसीसी देश भारत के लिए हमेशा से महत्त्वपूर्ण व्यापार भागीदार रहे हैं और ये भारत के परिवर्धित पड़ोस के महत्त्वपूर्ण अंग हैं।  

वेबिनार के पैनल विशेषज्ञों ने जीसीसी क्षेत्र के साथ द्विपक्षीय व्यापार और विविध क्षेत्रों में भारत का व्यापार बढ़ाने में आने वाली वर्तमान चुनौतियों तथा आगामी संभावनाओं पर चर्चा की। राजदूतों ने भारतीय कंपनियों से इन उभरते अवसरों का लाभ उठाने को कहा। 

ओमान में भारत के माननीय राजदूत श्री महावर ने इस बात पर जोर दिया कि भूमि की अच्छी उपलब्धता, बेहतरीन बुनियादी ढांचा, बंदरगाह, हवाईअड्डे, सड़कें, न्यून उपयोगिता लागत, विशेष रूप से सस्ती बिजली, इसकी रणनीतिक लोकेशन और मुक्त व्यापार व्यवस्था ओमान को भारतीय निवेश के लिए पसंदीदा स्थान बनाती है। ओमान ने अपने विजन 2040 में विविधीकरण के लिए विकास के प्राथमिक क्षेत्रों को चिह्नित किया है और भारत को ओमान के लिए रणनीतिक प्राथमिक भागीदार के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने खनन क्षेत्र, परिवहन, बुनियादी ढांचागत क्षेत्र और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र को सहयोग के लिए बेहतरीन बताया।   

कतर में भारत के माननीय राजदूत श्री मित्तल ने कहा कि कतर में फार्मासूटिकल क्षेत्र तथा तेल और गैस क्षेत्र में भारतीय निर्यातकों के लिए बड़े अवसर विद्यमान हैं। उन्होंने कतर में भागीदारी करने के इच्छुक भारतीय उद्यमों को सहयोग प्रदान करने का भी आश्वासन दिया।  

बहरीन में भारत के माननीय राजदूत श्री श्रीवास्तव ने बहरीन और सामान्यतया खाड़ी क्षेत्र में वैकल्पिक दवाओं, मेडिकल उपकरणों सहित फार्मासूटिकल उत्पादों तथा अक्षय ऊर्जा, विशेष रूप से सौर ऊर्जा और फिनटेक, डिजिटल तथा सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्रों में मौजूद अवसरों का उल्लेख किया। 

कुवैत में भारतीय दूतावास में द्वितीय सचिव (राजनीतिक, वाणिज्य और पीआईसी) श्री फहद अहमद ख़ान सूरी ने अपने संबोधन में इस बात का उल्लेख किया कि द्विपक्षीय व्यापार को केवल मात्रात्मक रूप से बढ़ाने की ही नहीं, बल्कि मौजूदा आधार के विविधीकरण की भी काफी संभावनाएं हैं। भारतीय निर्यातकों के लिए ऊर्जा क्षेत्र, बुनियादी ढांचागत परियोजनाएं, स्वास्थ्य सेवा, ऑटोमोबाइल, पेट्रोकेमिकल और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में काफी संभावनाएं हैं।  

अधिक जानकारी के लिए कृपया संपर्क कीजिएः

श्री डेविड सिनाटे, मुख्य महाप्रबंधक, शोध एवं विश्लेषण समूह, भारतीय निर्यात-आयात बैंक, केंद्र एक भवन, 21वीं मंज़िल, विश्व व्यापार केंद्र संकुल, कफ़ परेड, मुंबई - 400005, फोनः 91-22-2217 2701, ईमेलः dsinate@eximbankindia.in