बेहतर सहयोग के जरिए व्यापार और निवेश के परे और मजबूत किए जा सकते हैं भारत-जापान संबंधः इंडिया एक्ज़िम बैंक
इंडिया एक्ज़िम बैंक द्वारा 08 अक्टूबर, 2021 को ‘भारत-जापान आर्थिक साझेदारी: व्यापार और अन्य संभावनाएं’विषय पर एक वेबिनार आयोजित किया गया। इस दौरान श्री दम्मू रवि, सचिव [आर्थिक संबंध], विदेश मंत्रालय, भारत सरकार द्वारावर्चुअल रूप से इंडिया एक्ज़िम बैंक के शोध अध्ययन “भारत जापान व्यापार संबंधों को बढ़ाने के लिए संभावनाएं” का विमोचन किया गया। इस अवसर परश्री संजय कुमार वर्मा,जापान में भारत के माननीय राजदूत, श्री शिंगो मियामोटो, मंत्री (आर्थिक एवं विकास), भारत में जापान का दूतावास, इंडिया एक्ज़िम बैंक की प्रबंध निदेशक सुश्री हर्षा बंगारी तथा उप प्रबंध निदेशक श्री एन. रमेश उपस्थित रहे।
इस शोध अध्ययन में कहा गया है कि पिछले एक दशक में जापान के साथ भारत का कुल व्यापार 2019 में 5 बिलियनयूएस डॉलर के निर्यात तथा 13 बिलियनयूएस डॉलर के आयात के साथ 10 बिलियनयूएस डॉलर से बढ़कर लगभग 18 बिलियन यूएस डॉलर हो गया है।हालांकि, जापान के साथ व्यापक आर्थिक साझेदारी करार (सीईपीए) के बावजूद जापान के साथ भारत का निरंतर व्यापार घाटा चल रहा हैऔर इस दशक के दौरान दोगुने से भी अधिक यानी 2019 में लगभग 8 बिलियन यूएस डॉलर हो गया है।इस अध्ययन में, व्यापार पूरकता विश्लेषण के जरिए उन उत्पाद श्रेणियों की अनुशंसा की गई है, जिनके निर्यातों में भारत की स्थिति बेहतर है। इस शोध अध्ययन में यह भी उल्लेख किया गया है कि खनिज ईंधन और तेल, विद्युत मशीनरी और उपकरण, मशीनरी और यांत्रिक उपकरण, ऑप्टिकल, फोटोग्राफिक उपकरण, दवा उत्पाद, अपैरलऔर कपड़े आदि जैसी समग्रियों में भारत के निर्यात की महत्त्वपूर्ण संभावनाएं हैं।
इस शोध अध्ययन में इस बात परभी प्रकाश डाला गया है कि भारत को जापान में निर्यात करने के लिए टैरिफ और गैर-टैरिफ दोनों प्रकार कीबाधाओं का सामना करना पड़ता है और इससे पता चलता है कि बाद की सीईपीए समीक्षा वार्ताओं में भारत इन मुद्दों पर विचार-विमर्श कर सकता है।
शोध अध्ययन में इस बात को भी नोट किया गया है कि भारत-जापान संबंधों में द्विपक्षीय व्यापार से कहीं अधिक संभावनाएं हैं।भारत और जापान का उद्देश्य भारत की "एक्ट ईस्ट" नीति और जापान के स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत के दृष्टिकोण का समन्वय करना है।इस नीति समन्वय सेमेगा रीजनल कार्यक्रम यानी एशिया-अफ्रीका विकास कॉरिडोर (AAGC) की अवधारणाविकसित हुई, जिसका उद्देश्य एशिया और अफ्रीका के बीच संबंधों में सुधार लाना है।
इंडिया एक्ज़िम बैंक की प्रबंध निदेशक सुश्री हर्षा बंगारी नेअपने संबोधन में इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत और जापान के बीच एक मजबूत और सौहार्दपूर्ण संबंध है। जापान अपनी विकास गाथा में भारत के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण आर्थिक भागीदारों में से एक रहा है।पैनलिस्टों नेअन्य के साथ-साथ जापान के साथ द्विपक्षीय व्यापार में भारत के संबंधों और द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने के लिए सहयोग और वित्तपोषण संयुक्त परियोजनाओं, भारत-जापान सीईपीए, एशिया-अफ्रीका विकास कॉरिडोरजैसे मुद्दों की वर्तमान और भविष्य की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।
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श्री डेविड सिनाटे, मुख्य महाप्रबंधक, शोध एवं विश्लेषण समूह, भारतीय निर्यात-आयात बैंक, केंद्र एक भवन, 21वीं मंज़िल, विश्व व्यापार केंद्र कॉम्प्लेक्स, कफ़ परेड, मुंबई-400005, टेलीफोन:91-22-22860 363, ई-मेल: dsinate@eximbankindia.in
