पूर्वोत्तर के विकास में एमएसएमई क्षेत्र की अहम भूमिकाः इंडिया एक्ज़िम बैंक-यूएनडीपी
इंडिया एक्ज़िम बैंक ने 22 अक्टूबर, 2020 को भारत में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के साथ मिलकर “पूर्वोत्तर भारत में एमएसएमई क्षेत्र पर कोविड-19 का प्रभावः चुनौतियां और अवसर” विषय पर एक वेबिनार का आयोजन किया। वेबिनार में पूर्वोत्तर परिषद के सचिव श्री के. मोसेस चलाई; भारत में यूएनडीपी की निवासी प्रतिनिधि सुश्री शोको नोडा और इंडिया एक्ज़िम बैंक के प्रबंध निदेशक श्री डेविड रस्कीना जैसे कई उच्चाधिकारी उपस्थित रहे। यह वेबिनार इंडिया एक्ज़िम बैंक और यूएनडीपी के बीच चल रही ‘निर्यात स्पर्धात्मकता के लिए पूर्वोत्तर भारत में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की क्षमता विकास’ परियोजना का ही हिस्सा है।
वेबिनार में पूर्वोत्तर भारत के एमएसएमई क्षेत्र के विभिन्न पहलुओं पर फोकस करते हुए इस क्षेत्र में विद्यमान निर्यात संभावनाओं और इनका लाभ उठाने के लिए विशेष रूप से महामारी के इस दौर में इन्हें भुनाने के संभावित उपायों पर चर्चा की गई। कार्यक्रम के दौरान, इंडिया एक्ज़िम बैंक-यूएनडीपी परियोजना के सहयोग से प्रकाशित कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया गया। इसमें भारत के तीन पूर्वोत्तर राज्यों, असम, मिजोरम और नागालैंड में कृषि, हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्रों से विभिन्न केस स्टडी और उनके प्रभाव की कहानियां शामिल की गई हैं।
पूर्वोत्तर परिषद के सचिव श्री के. मोसेस चलाई ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में उद्योग 4.0 पर गंभीरता से विचार करने पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के इस दौर में इस क्षेत्र के उद्यमों ने कई नवाचार किए हैं। इस क्षेत्र की युवा पीढ़ी ने पहले से अधिक जोखिम लेना शुरू कर दिया है। उनका मानना है कि आज पूर्वोत्तर राज्यों में अच्छे नवोद्यम शुरू होने की काफी संभावनाएं हैं। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि इस क्षेत्र के सामने आने वाली गवर्नैंस संबंधी चुनौतियों पर काम करने का भी यह सही समय है।
यूएनडीपी की निवासी प्रतिनिधि सुश्री शोको नोडा ने इस मौके पर कहा कि इस महामारी से हमें यह पता चला है कि छोटे व्यवसाय कितने नाजुक हैं, खासकर महिलाओं के लिए, और इससे हमें एमएसएमई के लिए अपनाई जाने वाली लचीलेपन की प्रक्रिया के महत्त्व का भी पता चला है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) तभी हासिल कर सकता है जब पूर्वोत्तर राज्यों में शिक्षा और आजीविका की समान पहुंच हो। इस क्षेत्र में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और महिलाओं को स्थायी आजीविका प्रदान करने की दिशा में एमएसएमई बहुत बड़ा योगदान दे सकते हैं।
इंडिया एक्ज़िम बैंक के प्रबंध निदेशक श्री डेविड रस्कीना ने अपने वक्तव्य में पूर्वोत्तर राज्यों के लिए एमएसएमई के महत्त्व पर प्रकाश डाला और इस क्षेत्र में एमएसएमई के विकास तथा इस क्षेत्र से निर्यातों को बढ़ाने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी को सुधारने पर जोर दिया। कोविड-19 ने एमएसएमई की मूल्य श्रृंखला को बाधित कर दिया है। हथकरघा, हस्तशिल्प और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों पर विशेष असर पड़ा है। उन्होंने उद्यमियों से भविष्य में होने वाली इस तरह की बाधाओं से निपटने के लिए व्यापार निरंतरता बनाए रखने और रिकवरी योजना तैयार करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यूएनडीपी और इंडिया एक्ज़िम बैंक जैसी संस्थाएं इस क्षेत्र में अपनी मौजूदा गतिविधियों के आधार पर इस क्षेत्र के एमएसएमई के भावी प्रयासों में सहायता देने के लिए सही स्थिति में हैं।
पैनल विशेषज्ञों ने कोविड-19 महामारी के संदर्भ में, पूर्वोत्तर क्षेत्र में एमएसएमई क्षेत्र के लिए वर्तमान और भविष्य की संभावनाओं सहित विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया। कई उद्यमियों ने इस क्षेत्र में एमएसएमई को उचित समय पर सहोयग करने के लिए इंडिया एक्ज़िम बैंक और यूएनडीपी के प्रति आभार प्रकट किया। वेबिनार में इस क्षेत्र के विभिन्न उद्योग निकायों, उद्यमियों और संस्थाओं ने हिस्सा लिया।
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श्री डेविड सिनाटे, मुख्य महाप्रबंधक, शोध एवं विश्लेषण समूह, भारतीय निर्यात-आयात बैंक, केंद्र एक भवन, 21वीं मंज़िल, विश्व व्यापार केंद्र संकुल, कफ़ परेड, मुंबई - 400005, फोनः 91-22-2217 2701, ईमेलः dsinate@eximbankindia.in
