रिफाइंड पेट्रोलियम, इलेक्ट्रॉनिक्स, परिवहन, दालें आदि के जरिए भारत से कैरेबिया को बढ़ाया जा सकता है निर्यातः इंडिया एक्ज़िम बैंक और कैरेबएक्सपोर्ट्स का संयुक्त शोध अध्ययन
भारतीय निर्यात-आयात बैंक (इंडिया एक्ज़िम बैंक) और कैरेबियाई निर्यात विकास एजेंसी (सीईडीए) के संयुक्त शोध अध्ययन का विमोचन 11 नवंबर, 2022 को त्रिनिदाद और टोबैगो में “कैरेबियाई निवेश फोरम” के दौरान किया गया। इसका शीर्षक है- “भारत-कैरीफोरम सहयोग के लिए आपसी आर्थिक संबंधों और संभावनाओं को बढ़ाना”। इसका विमोचन श्री राजू शर्मा, उपराजदूत, त्रिनिदाद और टोबैगो में भारतीय उच्चायोग के कर कमलों से हुआ। इस दौरान श्री लिओ नॉट, उप कार्यकारी निदेशक (दाईं ओर), कैरेबियाई निर्यात विकास एजेंसी (सीईडीए) भौतिक रूप से और इंडिया एक्ज़िम बैंक के उप प्रबंध निदेशक श्री एन. रमेश वर्चुअल रूप से उपस्थित रहे।
भारतीय निर्यात-आयात बैंक (इंडिया एक्ज़िम बैंक) और कैरेबियाई निर्यात विकास एजेंसी (सीईडीए) ने “भारत-कैरीफोरम सहयोग के लिए आपसी आर्थिक संबंधों और संभावनाओं को बढ़ाना” विषय पर एक संयुक्त शोध अध्ययन किया है। इसका विमोचन श्री राजू शर्मा, उपराजदूत, त्रिनिदाद और टोबैगो में भारतीय उच्चायोग के कर कमलों से हुआ। इस दौरान श्री लिओ नॉट, उप कार्यकारी निदेशक, कैरेबियाई निर्यात विकास एजेंसी (सीईडीए) भौतिक रूप से और इंडिया एक्ज़िम बैंक के उप प्रबंध निदेशक श्री एन. रमेश वर्चुअल रूप से उपस्थित रहे। इसका विमोचन 11 नवंबर, 2022 को त्रिनिदाद और टोबैगो में व्यापार एवं उद्योग मंत्रालय, त्रिनिदाद और टोबैगो सरकार के सहयोग से कैरेबियाई निर्यात विकास एजेंसी और कैरेबियाई निवेश संवर्धन एजेंसी संघ (सीएआईपीए) द्वारा आयोजित “कैरेबियाई निवेश फोरम” के दौरान किया गया।
इस शोध अध्ययन में भारत और कैरेबियाई क्षेत्रों के लिए व्यापार, निवेश और परस्पर सहयोग के क्षेत्रों में मौजूद विभिन्न अवसरों का उल्लेख किया गया है।
शोध अध्ययन में, कैरेबियाई अर्थव्यवस्थाओं में मौजूद व्यापार की उदार प्रकृति को भी रेखांकित किया गया है और साथ ही इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत और कैरेबियाई देशों के बीच व्यापार में तीव्र वृद्धि दर्ज की गई है। भारत और कैरेबियाई देशों के बीच 2001 में 52.4 मिलियन यूएस डॉलर का व्यापार था, जो 2021 तक आते-आते बढ़कर 1.7 बिलियन यूएस डॉलर तक पहुंच गया। शोध में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि रिफाइंड पेट्रोलियम, इलेक्ट्रॉनिक्स, परिवहन, दालें, ऑप्टिकल उपकरण, अन्य के साथ-साथ पशुओं अथवा वनस्पति से प्राप्त वसा और तेल इत्यादि के जरिए भारत से कैरेबिया को निर्यात बढ़ाया जा सकता है।
कैरेबियाई क्षेत्र के देशों के साथ भारत की आर्थिक गतिविधियां अपनी वास्तविक क्षमता से कम रही हैं। इन अर्थव्यवस्थाओं का अलग-अलग आकार तथा इनसे भौगोलिक दूरी और कनेक्टिविटी इसके मुख्य कारण रहे हैं। तथापि, यह उल्लेखनीय है कि कैरेबियाई क्षेत्र में 2021 में 33.4 मिलियन की जनसंख्या और 185.3 बिलियन यूएस डॉलर का कुल सकल घरेलू उत्पाद रहा। कैरेबियाई देशों ने दुनिया के प्रमुख व्यापारिक देशों के साथ कई व्यापार करार किए हुए हैं। इसे देखते हुए भारतीय व्यवसाय जगत के लिए कैरेबियाई क्षेत्र में तो अपार संभावनाएं हैं ही, इसके अलावा यह क्षेत्र भारत के लिए विश्व के दूसरे हिस्सों के लिए भी प्रवेश द्वार साबित हो सकता है।
इस शोध अध्ययन में चुनिंदा कैरेबियाई देशों में निवेश ढांचे पर भी फोकस किया गया है और इन देशों में रचनात्मक उद्योग, सेवा उद्योग, विनिर्माण, रिज़ॉर्ट और होटल विकास, कृषि, आईसीटी और व्यवसाय प्रक्रिया आउटसोर्सिंग, लॉजिस्टिक्स और परिवहन, अक्षय ऊर्जा जैसे प्राथमिक क्षेत्रों में निवेश की आवश्यकता को रेखांकित किया गया है।
भारत और कैरेबियाई देशों के बीच आर्थिक संबंधों में सुधार के लिए इस शोध अध्ययन में कई नीतियां भी सुझाई गई हैं; जैसे - व्यापार और निवेश करारों का दायरा बढ़ाना, व्यापार सुगमीकरण के उपाय बढ़ाना, सक्रिय और लक्षित व्यापार संवर्धन गतिविधियां शुरू करने के साथ-साथ बुनियादी ढांचे में निवेश को बढ़ावा देना, लॉजिस्टिक क्षेत्रों में सुधार लाना, और कैरेबियाई देशों में मिशनों / दूतावासों की संख्या बढ़ाकर राजनयिक संपर्क बढ़ाने जैसे तमाम उपाय शामिल हैं।
विस्तृत जानकारी के लिए कृपया संपर्क करें:
श्री डेविड सिनाटे,
मुख्य महाप्रबंधक,
शोध एवं विश्लेषण समूह,
भारतीय निर्यात-आयात बैंक,
मेकर चेंबर्स IV, 8वीं मंज़िल,
नरीमन पॉइन्ट, मुंबई - 400021, भारत
फोनः 91-22-22860 333,
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