परियोजना निर्यातों के लिए वित्तपोषण का ढांचा मजबूत बनाना हो प्राथमिकताः श्री पीयूष गोयल
“वित्तपोषण के नवोन्मेषी माध्यमों के जरिए परियोजना निर्यातों के लिए वित्तपोषण के ढांचे को मजबूत बनाना और निर्यात ऋण एजेंसियों के लिए विवेकसम्मत मानदंड जैसे विनियमों की समीक्षा करना प्राथमिकता होनी चाहिए।“यह बात माननीय वाणिज्य एवं उद्योग, उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण और वस्त्र मंत्री श्री पीयूष गोयल ने भारतीय निर्यात-आयात बैंक (एक्ज़िम बैंक) द्वारा 05 मई, 2022 को नई दिल्ली में आयोजित सम्मेलन के दौरान कही। यह सम्मेलन ‘भारतीय परियोजना निर्यातकों के लिए वैश्विकक अवसर बढ़ाना’ विषय पर आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में अन्य के साथ-साथ, भारतीय परियोजना निर्यातकों के अलावा,भारत सरकार और भारत में विदेशी दूतावासों के प्रतिनिधियों, विकास वित्त संस्थाओं, ऋण बीमा एजेंसियोंऔर भारतीय कंपनियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस सम्मेलन में 150 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया।
सम्मेलन के दौरान श्री गोयल ने महामारी की बाधाओं के बावजूद भारतीय परियोजना निर्यातों के उल्लेखनीय स्तर पर बने रहने को रेखांकित किया। श्री गोयल ने उल्लेख किया कि देश वस्तुओं और सेवाओं, प्रत्येक के निर्यातों में 1 ट्रिलियनयूएस डॉलर के वृहत्तर लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है और परियोजना निर्यातों जैसे उभरते क्षेत्र इसके लिए महत्त्वपूर्ण हैं।
श्री गोयलने मुक्त व्यापार समझौतों के जरिए बाजार पहुंच बढ़ाने की भारत सरकार की प्रतिबद्धता के बारे में बात की। श्री गोयल ने स्टेकहोल्डरों को महत्त्वपूर्ण परियोजना बाजारों में सामने आने वाली चुनौतियों वाली नॉन-टैरिफ बाधाओं को हाइलाइट करने को कहा, ताकि मुक्त व्यापार समझौता वार्ताओं में उनका प्रभावी तरीके से समाधान किया जा सके। परियोजना निर्यातों के लिए विकसित बाजारों में बड़े अवसरों और उन बाजारों में विविधता की जरूरतको रेखांकित करते हुए श्री गोयल ने परियोजना निर्यातकों को बाजार पहुंच में आने वाली समस्याओं को चिह्नित करने के लिए प्रेरित किया, ताकि सरकार द्वारा उनका समाधान किया जा सके।
सम्मेलन के दौरान श्री गोयल ने एक्ज़िम बैंक के शोध अध्ययन ‘भारत से परियोजना निर्यातः बदलते परिवेश में संभावनाओं का पता लगाना’ का भी विमोचन किया और इस क्षेत्र में अध्ययन करने के लिए एक्ज़िम बैंक की सराहना की। स्टेकहोल्डरों के साथ परिचर्चा तथा डेस्क अनुसंधान पर आधारित इस शोध अध्ययन में भारत से परियोजना निर्यातों के परिदृश्य पर प्रकाश डाला गया है। साथ ही, भारतीय कंपनियों की कमजोरियों और शक्तियों का तुलनात्मक विश्लेषण किया गया है और कोविड-19 महामारी के प्रभाव का विश्लेषण करते हुए देश से परियोजना निर्यातों को बढ़ाने की रणनीतियां सुझाई गई हैं। श्री गोयल ने एक्ज़िम बैंक के एक और शोध अध्ययन ‘मुक्त व्यापार करारों में भारत की तत्परताः आगे की राह’ का भी विमोचन किया। इसमें भारत के प्रमुख व्यापार समझौतों और भारत के व्यापार पर इनके प्रभाव का विश्लेाषण किया गया है।
उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की मुख्य आर्थिक सलाहकार, सुश्री रूपा दत्ता ने अपने उद्घाेटन संबोधन के दौरान इस सम्मेलन की सामयिकता की सराहना की, जब दुनिया के विभिन्नो देशों द्वारा बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचागत निवेश किया जा रहा है और परियोजना निर्यातों के लिए भावी अवसर बन रहे हैं।
एक्ज़िम बैंक की प्रबंध निदेशक, सुश्री हर्षा बंगारी ने 2019 में हुए पिछले सम्मेलन के दौरान हुए विचार-विमर्श से परियोजना निर्यातों के लिए उपजी चुनौतियों और उन चुनौतियों से निपटने के लिए किए गए उपायों के बारे में बात की। इन उपायों में अन्य के साथ-साथ, आयडियाज़ दिशानिर्देशों में परियोजनाओं के सह-वित्तपोषण को शामिल करना, यूरो वित्तपोषण की जरूरत, अतिरिक्त सिक्योरिटी उपाय के रूप में एस्क्रो मैकेनिज्म को लाना और हरित तथा सामाजिक रूप से उत्तरदायित्वपूर्ण संपोषी परियोजनाओं को प्राथमिकता देने के लिए ईएसजी नीति को क्रियान्वित करना शामिल है।
अपने धन्यवाद ज्ञापन में सम्मेलन को सार रूप में प्रस्तुत करते हुए एक्ज़िम बैंक के उप प्रबंध निदेशक, श्री एन. रमेश ने इन चर्चाओं से निकली प्रमुख अनुशंसाओं को एकसूत्र में पिरोया। उन्होंने इस चर्चा से उभरे प्रमुख विषयों,वृहत्तर सहयोग की जरूरत, उद्योग की प्राथमिकताओं को भारत सरकार की प्राथमिकताओं के अनुरूप बनाने और परियोजना निर्यातों में नॉन-टैरिफ बाधाओं का मुक्त व्यापार समझौतों के जरिए समाधान करने जैसे उपायों पर बल दिया।
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श्री एस. प्रहलादन, मुख्य महाप्रबंधक, शोध एवं विश्लेषण समूह, भारतीय निर्यात-आयात बैंक,
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