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अन्वेषा ट्राइबल आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स के शिल्पकारों के लिए इंडिया एक्ज़िम बैंक ने आयोजित किया ट्राइबल जूलरी डिजाइन विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम

मुंबई, 18 सितंबर, 2020: इंडिया एक्ज़िम बैंक ने ओडिशा के भुवनेश्वर स्थित अन्वेषा आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स के 20 आदिवासी कारीगरों के लिए 30 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए सहयोग दिया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम ट्राइबल जूलरी के डिजाइन विकास के लिए आयोजित किया गया है। अन्वेषा ट्राइबल आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स (अन्वेषा), गैर-लाभकारी संगठन है, जो आदिवासी कारीगरों के प्रशिक्षण / क्षमता निर्माण और उनके उत्पादों की मार्केटिंग के माध्यम से ओडिशा के आदिवासी समुदाय के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए प्रयासरत है। 

भुनेश्वर में अन्वेषा के दो उत्पादन केंद्र हैं। एक ढोकरा शिल्प के लिए और दूसरा ट्राइबल जूलरी के लिए। अन्वेषा आदिवासी कला और शिल्प उत्पादों को चिह्नित कर उनके संरक्षण के साथ-साथ नवाचार के साथ बाजार में लाकर उन्हें लोकप्रिय बनाने और उनके प्रचार-प्रचार का काम करती है। ढोकरा जैसी समृद्ध और जटिल कला उत्पादों में कांसे और तांबे की मिश्रित धातुओं से बनी कलाकृतियां शामिल हैं। इन्हें मोम को पिघला कर तैयार किया जाता है, इसलिए इसे ‘लॉस्ट-वैक्स’ तकनीक भी कहते हैं। इन कलाकृतियों में ओडिशा का सांस्कृतिक वैभव झलकता है जो सहज ही मन को मोह लेता है। ओडिशा के विभिन्न इलाकों में विविधतापूर्ण जीवनशैली का प्रतिनिधित्व करने वाली सबसे अधिक 62 जनजातियां हैं। राज्य में शिल्प की एक समृद्ध विरासत है और प्रत्येक जनजाति की विशिष्टता उसकी परंपराओं, संस्कृतियों, मान्यताओं और प्रकृति के साथ उनके सद्भाव में निहित है। उनकी यही संस्कृति और सद्भाव उनके कला-कौशल में परिलक्षित होता है और बर्तनों, देवी-देवताओं की प्रतिमाओं, लैम्प, जूलरी, जूलरी बॉक्स, प्राचीन कलाकृतियों और गृह सज्जा के अन्य उत्पादों के रूप में आकार पाता है।   

अन्वेषा के साथ एससी, एसटी और ओबीसी से 2000 से अधिक कारीगर जुड़े हैं। अन्वेषा कारीगरों द्वारा की गई दस्तकारी, उनकी बनाई ट्राइबल जूलरी में न सिर्फ मानवजाति का प्रकृति के प्रति प्रेम आकार पाता है, बल्कि ये कलाकृतियां इस जनजाति की अनूठी सांस्कृतिक पृष्ठभूमि, विचारों और किंवदंतियों को चित्रित करती हैं, जिसे ये दस्तकार पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ा रहे हैं। ओडिशा की ट्राइबल जूलरी सामान्यतः स्थानीय सामग्रियों का उपयोग कर तैयार की जाती है और हाल के वर्षों में ये उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में लोकप्रियता हासिल कर रहे हैं। ट्राइबल समुदाय की सामाजिक-सास्कृतिक परंपराओं और आधुनिकता से मिश्रित इन सादगीपूर्ण आभूषणों को पसंद किया जा रहा है। अन्वेषा के सचिव, श्री दमबरुधर बहरा ने कहा, “हम पिछले 6 वर्षों से एक्ज़िम बैंक से जुड़े हैं। बैंक ने हमारी प्रगति में मदद की है जिसके लिए हम एक्ज़िम बैंक के आभारी रहेंगे और आशा करते हैं कि भविष्य में भी हमें एक्ज़िम बैंक से सहयोग मिलता रहेगा।”

अन्वेषा के 20 आदिवासी महिला कारीगरों के लिए बैंक के सहयोग से किया जा रहा यह डिजाइन विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम पहला ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम है। इसे कोविड-19 महामारी के मद्देनजर सामाजिक दूरी जैसी सावधानियों को ध्यान में रखते हुए ऑनलाइन आयोजित किया गया है। 

इस कार्यक्रम के मेंटर श्री पुनीत कौशिक अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त डिजाइनर हैं। उन्हें इस क्षेत्र में आदिवासी शिल्पकारों के साथ मिलकर काम करने का तीन दशकों से अधिक का अनुभव है। उन्हें 2009 में शिवाज़ स्टूडियो की ओर से आर्टिस्ट ऑफ द ईयर के ख़िताब से नवाज़ा गया था। उन्हें 2000 से 2002 के लिए संस्कृति मंत्रालय से जूनियर रिसर्च फेलोशिप मिली है और 1998 से 2000 तक वह जवाहरलाल नेहरू ट्रस्ट के नेहरू रिसर्च एसोसिएट भी रहे हैं। साथ ही वह ‘दस्तकार’ जैसी प्रतिष्ठित सोसायटी के बोर्ड के सदस्य भी हैं। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से उन्होंने पारंपरिक शिल्प तकनीकों को अपनाने और उन्हें आज की जरूरतों के अनुरूप बनाने की संकल्पना की। श्री पुनीत ने बताया कि, “यह आदिवासी और लोक स्वदेशी कला रूपों के संगम की तरह है।”    

मौजूदा डिज़ाइन विकास कार्यक्रम बाजार की मांग को ध्यान में रखते हुए, अन्वेषा के शिल्पकारों के कला कौशल को और निखारने तथा उत्पादों में विविधता लाने में मदद करेगा। इन उच्च गुणवत्ता वाले हस्तनिर्मित उत्पादों के माध्यम से अन्वेषा के घरेलू और अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से अन्वेषा ट्राइबल आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स के आदिवासी कारीगरों की आजीविका और आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा। एक्ज़िम बैंक की उप प्रबंध निदेशक हर्षा बंगारी जी ने अपने स्वागत संबोधन में आदिवासी कारीगरों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान में अन्वेषा के प्रयासों की प्रशंसा की और कार्यक्रम की सफलता की कामना की।