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भारत से कृषि निर्यातों के लिए वरदान साबित होगी सुदृढ़ व्यापार नीतिः इंडिया एक्ज़िम बैंक का शोध अध्ययन

भारत में कृषि नीतियां उत्पादन बढ़ाने पर केंद्रित रही हैं, ताकि हम आत्मनिर्भर हो सकें, आयातों पर निर्भरता कम हो और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इन प्राथमिक उद्देश्यों के साथ भारत में कीमतों में स्थिरता लाने के अल्पावधि लक्ष्यों को हासिल करने के लिए व्यापार नीति को एक साधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। इंडिया एक्ज़िम बैंक द्वारा हाल ही में किए गए एक शोध अध्ययन के अनुसार, इस संबंध में भारत सरकार का रुख बदला है। सरकार अब एक सुदृढ़ व्यापार नीति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि भारत विश्व पटल पर एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में उभर सके।  

इंडिया एक्ज़िम बैंक के “भारत से कृषि निर्यातों का संवर्धन” शीर्षक वाले इस शोध अध्ययन का विमोचन 12 नवंबर, 2021 को आयोजित “भारत से कृषि निर्यातः संभावनाएं और अवसर” विषयक वेबिनार के दौरान किया गया। इंडिया एक्ज़िम बैंक द्वारा इस वेबिनार का आयोजन भारत की आजादी के 75 वर्षों के उपलक्ष्य में मनाए जा रहे आज़ादी का अमृत महोत्सव श्रृंखला के अंतर्गत किया गया। इस वेबिनार में वक्ताओं के रूप में इंडिया एक्ज़िम बैंक, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार, कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा), शिक्षाविद और कृषि व्यवसायों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। वेबिनार में 150 से अधिक लोग उपस्थित रहे।     

इंडिया एक्ज़िम बैंक के शोध अध्ययन में उल्लेख किया गया है कि भारत 2019 में 34.8 बिलियन यूएस डॉलर के निर्यातों के साथ कृषि और संबंधित उत्पादों का 14वां सबसे बड़ा निर्यातक रहा। भारत में कृषि क्षेत्र से निर्यात योग्य सरप्लस धीरे-धीरे बढ़ा है और कृषि व्यापार धनात्मक होने के साथ-साथ इसमें व्यापार संतुलन बढ़ा है। लेकिन, बड़ा बुवाई क्षेत्र और कई कृषि वस्तुओं में सबसे बड़ा उत्पादक देश होने के बावजूद विभिन्न कृषि वस्तुओं के वैश्विक निर्यातों में भारत का हिस्सा काफी कम है। उदाहरण के लिए, गेहूं उत्पादन के मामले में वैश्विक स्तर पर भारत दूसरे नंबर पर है, किन्तु गेहूं के वैश्विक निर्यातों में देश का 34वां स्थान है। इसी तरह वैश्विक सब्जी उत्पादन में भी भारत दूसरे स्थान पर है, किन्तु इनके निर्यातों में इसका 14वां स्थान है। इसी प्रकार, वैश्विक फलोत्पादन के मामले में तीसरे स्थान पर है, किन्तु वैश्विक निर्यातों में 22वें स्थान पर है। बेल्जियम, इटली और नीदरलैंड जैसे भौगोलिक रूप से छोटे देशों का निर्यात भारत के निर्यातों से कहीं अधिक है।

इंडिया एक्ज़िम बैंक के अध्ययन में भारत में कृषि नीतियों को अन्य विकसित और विकासशील बाजारों के अनुरूप बनाने का सुझाव दिया गया है और वहां की श्रेष्ठतम पद्धतियों को चिह्नित करने के साथ-साथ देश से कृषि निर्यातों को बढ़ाने के लिए विभिन्न रणनीतियां सुझाई गई हैं। इन रणनीतियों में अन्य के साथ-साथ निर्यात बाजार अपेक्षाओं के अनुसार गुणवत्ता उन्नयन, उन्नत प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल करते हुए कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं में सुधार करना, योजनाओं को विश्व व्यापार संगठन के अनुरूप बनाना, कृषि क्षेत्र में पीपीपी मॉडल को अपनाना, ब्रांड इंडिया को मजबूत करना शामिल हैं। अध्ययन में कृषि उत्पादों में व्यापार के लिए बाजार पहुंच संबंधी मसलों के समाधान के लिए एकीकृत निकाय बनाने की सिफारिश भी की गई है।  

वेबिनार के दौरान अपने संबोधन में इंडिया एक्ज़िम बैंक की प्रबंध निदेशक सुश्री हर्षा बंगारी ने कृषि क्षेत्र में तकनीक उद्यमियों को इंडिया एक्ज़िम के सहयोग का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कृषि क्षेत्र से निर्यातों को बढ़ाने में तकनीकी उपायों के महत्त्व को रेखांकित किया। इंडिया एक्ज़िम बैंक के उप प्रबंध निदेशक श्री एन. रमेश ने इस पर प्रकाश डाला कि भारत का कृषि क्षेत्र अर्थव्यवस्था के लिए किस प्रकार आशा की किरण के रूप में उभर रहा है। श्री एन. रमेश द्वारा संचालित पैनल चर्चा के दौरान, पैनल विशेषज्ञों ने कृषि निर्यातों में सामने आने वाली चुनौतियों और भारत से 100 बिलियन यूएस डॉलर के कृषि निर्यातों के लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत के कृषि व्यापार को बढ़ाने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया। पूर्ण सत्र के दौरान डॉ. सी. वनलालरामसंगा, आर्थिक सलाहकार, वाणिज्य विभाग, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने हालिया दौर में भारत से कृषि निर्यातों में हुई तीव्र वृद्धि और इस क्षेत्र को मदद के लिए भारत सरकार द्वारा की गई पहलों का उल्लेख किया।  

अंतरराष्ट्रीय खाद्य अनुसंधान संस्थान के वरिष्ठ रिसर्च फेलो डॉ. देवेश रॉय ने कृषि क्षेत्र से निर्यातों की अदोहित उल्लेखनीय संभावनाओं, अन्य देशों की कृषि नीतियों के बारे में बताया और इस क्षेत्र से भारत से निर्यातों को बढ़ाने के लिए रणनीतियां भी सुझाईं। एपीडा के निदेशक डॉ. तरुण बजाज ने प्रतिभागियों को बताया कि महामारी के दौरान भी एपीडा ने किस तरह कृषि निर्यातों में वृद्धि को बनाए रखने के प्रयास किए। साथ ही, कृषि व्यवसायों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में संभावनाएं तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया।

वेबिनार में कृषि कारोबार से जुड़े प्रतिनिधि भी वक्ता के रूप में उपस्थित रहे, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कृषि उत्पादों की स्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए प्रमुख पहलुओं पर चर्चा की। साथ ही, कृषि वैल्यू चेन के एकीकरण और ब्रांड वैल्यू को सुदृढ़ करने की जरूरत पर जोर दिया। 

विस्तृत जानकारी के लिए कृपया संपर्क कीजिएः श्री एस. प्रहलादन, मुख्य महाप्रबंधक, भारतीय निर्यात-आयात बैंक, केंद्र एक भवन, 21वीं मंज़िल, विश्व व्यापार केंद्र संकुल, कफ परेड, मुंबई 400 005. फोनः +91-22- 2286 0333; ईमेल: prahalathan@eximbankindia.in